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11 questions related to corona infection world have not been able to answer prsgnt

कोरोना से जुड़े 11 सवाल, जिनके जवाब दुनियाभर के वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और जानकार नहीं दे पाए हैं!

  • Updated on 5/14/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर के देश संक्रमित मामलों की गणना कर पाने में असर्मथ हो रहे हैं। कुछ देश, राज्य अपने यहां संक्रमित लोगों की संख्या छुपा रहे हैं तो कुछ कोरोना मरीजों की मौतें, लेकिन अब सवाल किए जा रहे है कि आखिर दुनिया में कोरोना से संक्रमित सही मामले कितने हैं।

अभी तक सामने आए अधिकारिक आंकड़ों की माने तो दुनियाभर में 4,445,562 लोग संक्रमित हो चुके हैं, इनमें से 298,439 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,669,176 लोग रिकवर हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े वास्तविक नहीं हैं। वो ये मानते हैं कि देशों की सरकारें अपने यहां के सभी मामलों को पूरी तरह से दर्ज कर पाने में असमर्थ हैं।

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ऐसे ही कुछ सवाल है जो दुनियाभर में कोरोना को लेकर पूछे जाते हैं, आईये इनके बारे में हम पॉइंट्स में बताते हैं...  

-कोरोना टेस्टिंग को लेकर राज्यों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई है। कुछ का कहना है कि उनके यहां पूरी तरह से टेस्टिंग हुई है लेकिन उसके बाद भी मामले आंकड़ों के विपरीत जाते दिखे हैं। वहीँ, शुरुआत में कहा गया था कि टेस्टिंग और ट्रेसिंग से मामले पहचाने जा सकते हैं लेकिन अब तक यह भी पता लग सका है कि हर राज्य में 10 लाख लोगों पर कितने टेस्ट किए जा सके हैं।

-सोशल डिस्‍टेंसिंग को लेकर अभी तक क्लियर नहीं हुआ है कि कितनी दूरी पर रह कर कोरोना से बचा जा सकता है। पहले कहा गया कि 1 मीटर की दूरी फिर कहा गया कि 6 मीटर की दूरी फिर यह भी कहा गया कि छींकने और खांसने से 8.5 मीटर तक वायरस हमला कर सकता है। इसके सभी कन्फ्यूज्ड हैं कि आखिर उन्हें कितनी दूरी पर खड़ा होना है ताकि वो कोरोना से बच सकें।

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-कुछ देशों में कोरोना का असर ज्यादा है तो कहीं मौतें ज्यादा हो रही हैं, तो वहीँ किसी देश के राज्य में संक्रमण पर कंट्रोल है और मौतें भी वहां कम है। लेकिन उसी देश के दूसरे राज्य में इसके विपरीत भी देखा जा रहा है। ऐसा क्यों है इसका कारण नहीं पता लग सका है।

-कोरोना पर मौसम के असर को लेकर अभी तक कुछ क्लियर नहीं हुआ है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ठंडे मौसम में फैलता है और गर्म मौसम में ये कम हो जायेगा। लेकिन अगर ऐसा है तो कई देश ऐसे हैं जहां मौसम ठंडा है लेकिन वहां कोरोना का प्रसार काफी कम है और कुछ देश गर्म है लेकिन वहां कोरोना का संक्रमण काफी तेज है।

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-कोरोना संक्रमित लोग दोबारा कोरोना की चपेट में आ सकते हैं इस बात को लेकर अभी तक वैज्ञानिक व स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ की तरफ से कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला है। चीन से कोरोना कम होने के बाद उन लोगों में फिर से कोरोना संक्रमण देखा गया जो पहले ठीक हो चुके थे। इस सवाल को लेकर वैज्ञानिक व स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ मानते हैं कि व्यक्ति की इम्यून शक्ति इसके लिए जिम्मेदार है।

-कोरोना वैक्सीन को बनाए जाने को लेकर कई सवाल लोगों के जेहन में हैं लेकिन वैक्सीन कब तक आ जाएगी इस बारे में अभी तक कोई जवाब वैज्ञानिक नहीं दे सके हैं। वैज्ञानिकों की माने तो साल-दो साल में कोई भी वैक्सीन नहीं आ सकती। अब तक सबसे तेजी से जो वैक्सीन बनाई गई है उसने भी 4 साल लिए हैं।

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-वैक्सीन की जगह कोरोना मरीजों को कई दूसरी बिमारियों में दी जाने वाली दवाएं दी जा रही हैं। लेकीन यहां ये भी तय नहीं है कि कौनसी एक दवा देना सही होगा। डॉक्टरों द्वारा कई तरह की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं जो काम कर रही हैं। इन नामों में मलेरिया की दवा, टीबी की दवा, खून पतला करने वाली दवा और भी कई तरह की दवाएं शामिल हैं।

-कोरोना मरीजों के लिए वेंटिलेटर की जरूरत को लेकर कई देशों के डॉक्‍टर्स एकमत नहीं हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों को ही वेंटिलेटर पर रखा जाएं लेकिन कई डॉक्टर्स यह भी मानते हैं कि इससे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है।

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-बच्चों में कोरोना न होने के बारे में शुरुआत में कहा गया था लेकिन अब दुनिया के कई देशो से बच्चों के कोरोना संक्रमित होने की खबरें लगातार आ रही हैं। भारत भी इनमें शामिल हैं। इतना ही नहीं बच्चों में कोरोना के कुछ नए लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

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