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11 special points of opposition meeting parties chaired by Sonia Gandhi attack modi govt rkdsnt

सोनिया की अध्यक्षता में हुई विपक्षी दलों की सांझा बैठक के ये हैं 11 खास बिंदु

  • Updated on 5/22/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना संकट के बीच शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की बैठक हुई। वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई इस बैठक में 22 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी ने सर्वसम्मत से अम्फन तूफान से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हुई तबाही पर गहरी चिंता जताते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की केंद्र सरकार से मांग की। वहीं सोनिया ने कोरोना संकट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए घोषित आर्थिक पैकेज को देश के साथ क्रूर मजाक बताया। 

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- सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी (आप) इस बैठक में शामिल नहीं हुई। करीब 4 घंटे तक चली इस बैठक के बाद सभी 22 दलों के नेताओं संयुक्त रूप से 11 बिंदु का डिमांड चार्टर जारी किया। जिसमें मांग की गई कि आयकर दायरे में नहीं आने वाले सभी परिवारों को 7500 रुपये अगले छह महीने तक दिए जाएं। जिसमें से 10000 हजार रुपये की एकमुश्त तत्काल मदद दी जाए। 

- हर जरूरतमंद को छह महीने तक मुफ्त 10 किलो राशन दिया जाए। साथ ही मनरेगा का कार्यदिवस 200 दिन किया जाए। प्रवासी मजदूरों की निःशुल्क घर वापसी का इंतजाम करने के साथ-साथ विदेशों में फंसे छात्र-छात्राओं और भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। श्रम कानूनों में की जा रही मनमानी बदलावों को रद्द किया जाए। 

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- रबी की फसलों की एमएसपी पर खरीद हो और खरीफ फसलों के जरूरी कीटनाशक, खाद-बीज का पूरा इंतजाम हो। कोरोना की लड़ाई प्रांतीय और जिला स्तर पर लड़ी जा रही है, इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि प्रांतीय सरकारों को विशेष राहत पैकेज दे। 

- केंद्र सरकार लॉकडाउन से बाहर निकलने की रणनीति और नीति बताए, संसद और संसदीय समितियों की कार्यवाही शुरू की जाए, सरकार घोषित राहत पैकेज पर पुनर्विचार कर दोबारा से निर्णायक मदद वाला पैकेज दे और अंतर्राष्ट्रीय वह अंतर्राज्यीय हवाई सेवा शुरू करते हुए राज्य सरकारों से आवश्यक विचार विमर्श करे। 

- इसके पहले सर्वसम्मत से अम्फन चक्रवाती तूफान से हुई तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पास किया और ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल को आर्थिक मदद देने की केंद्र से मांग की।  वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में सोनिया गांधी ने कहा कि अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना संकट को लेकर जो शुरुआती उम्मीद जताई थी, वह गलत धारणा साबित हुई। 

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- उन्होंने कहा कि नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी लागू करने के चलते देश की अर्थव्यवस्था पर कोरोना आने से पहले ही संकट छा गया था। 2017-18 में ही अर्थव्यवस्था गिरने लगी थी। सात तिमाही तक लगातार जीडीपी में गिरावट कोई सामान्य बात नहीं थी, फिर सरकार अपनी गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 11 मार्च को कोविड-19 को महामारी घोषित किया। 

- हम सभी ने सरकार को इससे निपटने में पूरा सहयोग और समर्थन की बात कही। यहां तक कि 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित करने का भी हमने समर्थन किया। दुखद स्थिति यह कि सरकार ने न तो पहले से कोई तैयारी की और न ही अब इससे बाहर निकलने की उसकी कोई तैयारी दीखती है।

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- उन्होंने कहा कि 21 दिन में इस महामारी से जंग जीत लेने का प्रधानमंत्री का अंदाजा गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस तब तक रहेगा, जब तक कि वैक्सीन नहीं बन जाती। 

- उन्होंने कहा कि कोरोना जांच और जांच किट के आयात के मामले में भी सरकार फेल रही। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की हालत बेहद खराब है। हर बड़ा अर्थशास्त्री यही सलाह दे रहा है कि सरकारी प्रोत्साहन की तत्काल जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज घोषित किया, जिसके बारे में वित्तमंत्री पांच दिनों तक जानकारियां देती रहीं, लेकिन यह पैकेज देश के लिए क्रूर मजाक बन कर रह गया। 

- लाखों प्रवासी मजदूर और उनके बच्चे बिना पैसे, भोजन और दवाओं के सैकड़ों किलोमीटर पैदल अपने घरों को जाने को मजबूर हुए। कृषक मजदूरों, भूमिहीन किसान, दुकानदार, कारोबारी, स्वरोजगार 13 करोड़ परिवारों, 6.3 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) में काम करने वाले 5.8 करोड़ कर्मचारियों की सरकार ने बड़ी क्रूरता से अनदेखी की।

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- सोनिया ने कहा कि विपक्ष के तमाम दलों की ओर से सरकार से मांग की गई कि गरीबों के पास तत्काल नगदी पहुंचनी चाहिए। सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए। प्रवासी मजदूरों को उनके घर जाने के लिए बस और ट्रेन मुहैया करवाई जाए। नियोक्ता और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए वेतन असिस्टेंस और वेतन सुरक्षा फंड की स्थापना की जाए, लेकिन सरकार ने हमारी एक न सुनी।


 

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