Wednesday, Apr 14, 2021
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200 women will become naga sannyasins by donating pandanas rites begin albsnt

पिंडदान कर 200 महिलाएं बनेंगी नागा संन्यासी,संस्कार शुरू

  • Updated on 4/7/2021

हरिद्वार/योगेश योगी। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के माईवाड़ा में महिला संन्यासियों  का संन्यास दीक्षा कार्यक्रम बुधवार से प्रारम्भ हो गया। करीब 200 महिलाओं को नागा संन्यासी बनाया जाएगा। इनके  मुण्डन प्रक्रिया की दुखहरण हनुमान मन्दिर के निकट बिड़ला घाट पर प्रारम्भ हुई। गोपनीय तरीके से प्रारम्भ हुई इस प्रक्रिया के दौरान माईबाड़ा की पदाधिकारी मौजूद रही। जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि  महाराज और सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज की देख रेख में प्रक्रिया हुई। 

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जीवित रहते कर लेते है अपना पिंडदान  
बता दें कि सबसे पहले महिला नागा संन्यासियों  का मुण्डन हुआ। मुण्डन प्रक्रिया के बाद इन सभी ने दण्ड व कमण्डल धारण किया। इसके बाद गंगा स्नान कर स्वयं का जीते जी श्राद्व कर्म किया गया। इसके बाद अपने सभी सगे सम्बन्धियों से हर प्रकार के सम्बन्ध खत्म कर दिए जाएंगे। महिला नागा  के लिए माईबाड़ा केवल जूना अखाड़े में ही है।

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संन्यास दीक्षा में होते हैं पांच संस्कार
 मालूम हो कि जूना अखाड़े की महिला अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आराधना गिरी ने बताया कि संन्यास दीक्षा में 5 संस्कार होते है।जिसमे 5 गुरु बनाये जाते है। जब कुम्भ पर्व पड़ता है तो वहां गंगा घाट पर मुंडन, पिण्डदान क्रियाक्रम होते हैं। जिसके बाद रात्रि में धर्मध्वजा के पास जाकर ओम नमः शिवाय का जाप किया जाता है। जहाँ आचार्य महामंडलेश्वर विजया होम के बाद सन्यास दीक्षा देते हैं। जिसके बाद उन्हें तन ढकने को पौने के मीटर कपड़ा दिया जाता है। फिर सभी गंगा में 108 डुबकियां लगाती हैं और फिर स्नान के बाद अग्नि वत्र धारण कर अपने आशीर्वाद लेती है। इन महिला संन्यासियों के दीक्षित किये जाने की प्रक्रिया वीरवार को तड़के आचार्य पीठ द्वारा प्रेयस मंत्र दिये जाने के साथ ही पूर्ण होगी।

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