2019 चुनाव में 'मोदी बनाम ऑल' की लड़ाई, कितना झूठ-कितना सच?

  • Updated on 1/16/2019

नई दिल्ली/श्वेता यादव। 2019 के लोकसभा चुनाव मुहाने पर आ चुके हैं और इसी के साथ सभी राजनीतिक दल प्रचार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। बीजेपी के समर्थक तरह-तरह के जुमलों और तर्कों के साथ बीजेपी सरकार के बेहतर कामों और 'एक बार फिर मोदी' जैसे नारों के साथ बीजेपी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। ऐसे ही एक नारा है 'मोदी बनाम ऑल'। 

खड़गे ने CBI के अंतरिम निदेशक को लेकर मोदी सरकार पर बोला हमला

मोदी समर्थकों का मानना है कि विपक्ष एक साथ आकर सिर्फ मोदी के खिलाफ लड़ रहा है। इसको इसतरह से कह सकते हैं कि सभी विरोधी पार्टियां गठबंधन की सरकार बनाकर अकेले मोदी को हराना चाहती है। वहीं विपक्ष का कहना है कि ये सीधे तौर पर जनता को बरगलाने की बिसात भर है। आपको हर तरफ ये बताया जा रहा है कि ये 'मोदी बनाम गठबंधन' की लड़ाई है? क्या वाकई 2019 का चुनाव पूरी तरह से 'मोदी बनाम ऑल' है?

देश के सभी राज्यों पर एक नजर डालें तो ऐसा बिल्कुल भी नजर नहीं आता। अकेले विपक्ष ही गठबंधन नहीं कर रहा है बल्कि भाजपा भी गठबंधन के भरोसे हैं।

प्रदेशवार जानिए क्या है असली चेहरा?

उत्तर प्रदेश में जहां 80 सीटें हैं यहां बीजेपी को अपना दल समर्थन दे रहा है। दूसरी तरफ एसपी और बीएसपी एक साथ आए हैं। वहीं कांग्रेस अभी तक अकेले है इस हिसाब से कांग्रेस सिर्फ एक अकेली पार्टी है। यहां मोदी अकेले नहीं हैं। 

बिहार की 40 सीटों पर बात करें तो नीतीश कुमार की पार्टी के साथ रामविलास पासवान ही भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। दूसरी तरफ आरजेडी-कांग्रेस और छोटे दलों का गठबंधन होगा। इसतरह से ये मोदी के खिलाफ सभी नहीं हुआ। दोनों ही तरफ गठबंधन होगा। 

पश्चिम बंगाल की 42 सीटों पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी लड़ रही हैं तो दूसरी तरफ भाजपा है। तीसरी तरफ कांग्रेस है और चौथा कोण लेफ्ट का होगा। यहां किसी भी तरह को कोई गठबंधन नजर नहीं आ रहा। संभावना है कि लेफ्ट-कांग्रेस एक हो जाएं। तब भी यह मोदी बनाम ऑल नहीं कहलाएगा।

महाराष्ट्र की 48 सीटों पर कांग्रेस-एनसीपी साथ है। दूसरी तरफ बीजेपी-शिवसेना है। मतलब यहां भी चुनाव गठबंधन बनाम गठबंधन का है।

तमिलनाडु की बात करें तो यहां 39 सीटों पर एक तरफ डीएमके-कांग्रेस-कमल हासन-लेफ्ट हैं तो दूसरी तरफ एआईडीएमके-बीजेपी-रजनीकांत और बाकी छोटे दल हैं। गठबंधन बनाम गठबंधन का चुनाव यहां भी है।

केरल में भी कुछ ऐसा ही हाल है 20 सीटों पर एक तरफ लेफ्ट का गठबंधन है। दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन है। वहीं तीसरी तरफ बीजेपी गठबंधन है। तीनों एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। 

मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। एसपी-बीएसपी जैसे छोटे दल भी अलग से लड़ रहे हैं। यहां भी मोदी बनाम ऑल नहीं माना जा सकता।

राजस्थान की 25 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी सीधे टक्कर में है। यहां भी छोटे-छोटे दल अलग लड़ रहे हैं चुनाव। गुजरात की 26 सीटों पर भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है।

'कोटलर प्रेसिडेंशियल अवार्ड' को लेकर राहुल ने किया प्रधानमंत्री पर कटाक्ष

पंजाब की बात करें तो 13 सीटों पर एक तरफ कांग्रेस अकेले हैं। दूसरी तरफ बीजेपी-अकाली का गठबंधन है। तीसरी ओर आम आदमी पार्टी है। यह कैसे मोदी बनाम ऑल हुआ?

नार्थ-ईस्ट जिसमें असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्कम और त्रिपुरा शामिल हैं की 25 सीटों में भी कुछ ऐसा ही हाल है जहां बीजेपी छोटे-मोटे 6 दलों के साथ सरकार में हैं और चुनाव लड़ रही है। यहां सब जगह गठबंधन बनाम गठबंधन ही चुनाव है। 

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की 9 सीटों पर पूरी तरह से लड़ाई ही कांग्रेस-बीजेपी की है। यहीं दोनों पार्टियां मुख्य दल हैं। 

दिल्ली, हरियाणा (10) जैसे राज्यों में भी तीन से अधिक मजबूत राजनीतिक कोण हैं और सभी एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। 

दक्षिण की तरफ जाएं तो बीजेपी के लिए रास्ते और भी ज्यादा मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे में इसे मोदी बनाम ऑल कहना ही गलत होगा। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना की 42 सीटों पर बीजेपी मजबूत ही नहीं है। तब यह चुनाव किस तरह भी मोदी बनाम ऑल नहीं हुआ। 

इसतरह से इन तर्कों के आधार पर कह सकते हैं सत्तारुढ़ दल का 'मोदी बनाम सभी' का फार्मूला झूठलाया जा सकता है। जहां भले ही विपक्ष मोदी का ताकत के आगे उतना मजबूत नहीं दिखता। लेकिन भाजपा को 2019 में हराने का दावा करने वाला विपक्ष अकेले गठबंधन की बागडोर नहीं पकड़ रहा। खुद भाजपा भी इसमें शामिल मानी जा रही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.