Friday, May 07, 2021
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भीमा- कोरेगांव मामले में दुष्प्रचार के लिए बनाए गए थे 250 ट्विटर हैंडल

  • Updated on 9/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार को कहा कि कोरेगांव-भीमा हिंसा के बारे में दुष्प्रचार करने और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेशों में कथित तौर पर प्रदर्शनों के आयोजन के लिए समर्थन जुटाने की खातिर लगभग 250 ट्विटर हैंडल बनाए गए थे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने राज्य के गृह विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उल्लेख किया गया है कि कोरेगांव- भीमा हिंसा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए एक व्यापक ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया था।

उन्होंने कहा कि कोरेगांव-भीमा हिंसा पर सोशल मीडिया में वीडियो और भाषणों को पोस्ट कर दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के परिणामस्वरूप ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ और एक ज्ञात समूह ने इन विरोधों का समर्थन किया। हालांकि उन्होंने समूह का नाम नहीं बताया।

इससे पहले भीमा- कोरेगांव हिंसा को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार वामपंथी चिंतकों के बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने कहा कि इन की गिरफ्तारी ठोस सबूतों के आधार पर किया गया है न कि किसी रंजिश के कारण।

महाराष्ट्र पुलिस ने इस नोटिस के जवाब में ही अपना हलफनामा न्यायालय में दाखिल किया है। पुलिस ने दावा किया है कि ये कार्यकर्ता देश में हिंसा फैलाने और सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने की योजना बना रहे थे। राज्य पुलिस का कहना है कि असहमति वाले दृष्टिकोण की वजह से इन्हें गिरफ्तार करने की धारणा को दूर करने के लिये उसके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं।

महाराष्ट्र पुलिस ने इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया है कि याचिकाकर्ता रोमिला थापर, और अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक तथा देविका जैन, समाजशास्त्री सतीश देशपाण्डे और कानून विशेषज्ञ माजा दारूवाला ने किस हैसियत से याचिका दायर की है और कहा कि वे इस मामले की जांच से अजनबी हैं।

महाराष्ट्र पुलिस ने 28 अगस्त को कई राज्यों में प्रमुख वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे थे और माओवादियों से संपर्क होने के संदेह में कम से कम पाचं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जबर्दस्त विरोध किया था।

पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान प्रमुख तेलुगू कवि वरवरा राव को हैदराबाद और वेरनॉन गोन्साल्विज और अरूण फरेरा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था जबकि ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को फरीदाबाद और नागिरक अधिकारों के कार्यकर्ता गौतम नवलखा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे के निकट आयोजित एलगार परिषद कार्यक्रम के बाद भीमा-कोरेगांव गांव में भड़की हिंसा की जांच के सिलसिले में ये छापेमारी की थी।

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