Wednesday, Nov 13, 2019
3 years of demonetisation modi government

नोटबंदी के 3 साल: नकद लेन-देन अब भी है पंसद, जानें भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा क्या असर

  • Updated on 11/8/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मोदी सरकार द्वारा तीन साल पहले 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद किये जाने तथा बाद में पांच सौ व दो हजार रुपये के नये नोट जारी करने के चलते काले धन में कमी आई है। ऐसा एक सर्वे में लोगों से की गई बातचीत में यह स्पष्ट हुआ है। लोग मानते हैं कि नोटबंदी के बाद ज्यादा लोग टैक्स के दायरे में आये हैं।

आर्थिक मंदी के साथ ही लोगों की आय पर इसका बुरा असर
वहीं इसका नकारात्मक पहलू यह रहा है कि आर्थिक मंदी के साथ ही लोगों की आय पर इसका बुरा असर पड़ा है खासकर असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों पर। नोटबंदी के बाद यद्यपि आम लोगों में नकदी का लेन देन घटा है लेकिन संपत्तियों की खरीद में नकदी का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है। लोकल सर्किल द्वारा कराये गये इस सर्वे के अनुसार अभी भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो डिजिटल भुगतान की अपेक्षा नकद लेन-देन ज्यादा पसंद करते हैं।

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नोटबंदी के प्रभाव

  • 2000 के नये नोटों ने लोगों के कैश होल्ड करने की क्षमता बढ़ा दी।
  • नकद लेन-देन में कमी लाना नोटबंदी का एक प्रमुख उद्देश्य था। 
  • अभी भी 36 फीसदी लोग ग्रोसरी तथा 31 फीसदी लोग घरेलू नौकरों को नकद ही भुगतान करते हैं। 
  • सिर्फ 12 फीसदी लोगों ने बताया कि वे कोई भुगतान नकद नहीं करते हैं। 
  • नोटबंदी के बाद पूरे देश में नकली नोटों के पकड़े जाने की घटनायें काफी कम हो गई हैं। 

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नोटबंदी के लाभ

42 फीसदी लोगों का मानना है कि टैक्स चोरी करने वाले लोग अब बड़ी संख्या में टैक्स के दायरे में आ गये हैं। वहीं 21 फीसदी मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में ब्लैक मनी घटी है। 12 फीसदी लोगों के अनुसार इससे प्रत्यक्ष कर में  वृद्धि हुई है। वहीं 25 फीसदी लोग नोटबंदी में कोई फायदा नहीं देखते हैं। 

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ब्लैकमनी घटाने के लिए क्या हो अगला कदम

  • 42 फीसदी ने कहा सभी मंत्रियों, सरकारी अफसरों व उनके परिवार के लोगों की सारी संपत्ति का खुलासा होना चाहिए।
  • 29 फीसदी ने कहा सभी संपत्तियों को आधार से जोड़ा जाना चाहिए। 
  • 11 फीसद ने कहा 2000 के नोट तत्काल बंद किये जाएं।
  • पांच फीसदी लोगों ने कहा बैंकों में लेनदेन पर 2 फीसद कर लगना चाहिए
  • लोकल सर्किल्स ने कराया सर्वेक्षण

इस सर्वे में कुल 50000 जवाब मिले। 

  • 220 शहरों के लोगों को इसमें शामिल किया गया।
  • सबसे अधिक 42 फीसदी टायर-1 सिटी के इसमें शामिल हुए। 
  • 34 फीसदी महिलायें शामिल

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