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साल के शुरुआती छह महीनों में नहीं बिकीं 3000 लक्जरी कारें, जाने क्या रहा कारण

  • Updated on 7/23/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत की लग्जरी कार मार्कीट (Market) इस साल पहले 6 माह में काफी सुस्त रही और यह घटकर एक चौथाई तक रह गई। उद्योगपति इस सुस्ती के लिए आर्थिक विकास में आई मंदी और चुनावों(Election) के दौरान पैदा हुई अनिश्चितता के माहौल को जिम्मेदार मान रहे हैं जिसने ग्राहकों को चौकस कर दिया है। मर्सडीज बेंज(Mercedes-Benz) और ऑडी निर्माता उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार होगा। 

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हालांकि वे अर्थव्यवस्था में निरंतर जारी कमजोरी, जी.एस.टी. की ऊंची दरों और आयात की बढ़ी लागतों के बारे में भी चेता रहे हैं। वे यह डर भी जाहिर कर रहे हैं कि सरकार की तरफ  से पिछले दिनों 2 करोड़ से अधिक की सालाना कमाई करने वालों पर लगाया गया अधिक टैक्स भी उनके लक्षित ग्राहकों को निरुत्साहित कर रहा है।

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नए मानकों के चलते वाहनों की कीमतों में बढ़ौतरी
एक तरफ  उन्हें अप्रैल, 2020 से बी.एस.-6 वाहनों के प्रोडक्शन(Production) की तैयारियां करनी पड़ रही हैं और गाडिय़ों के सुरक्षा मानकों को मजबूत करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ  2030 तक इलैक्ट्रिक वाहनों(Electric vehicles) के प्रोडक्शन के सरकार के रोडमैप के हिसाब से भी चलना पड़ रहा है। इसके कारण लागत बढऩे से वाहनों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।

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परिणामस्वरूप बिक्री(Sale) में और गिरावट हो रही है। हालत यह है कि ऑटोमोबाइल कम्पनियों(Automobile Company) के पास तकरीबन 30,000 करोड़ रुपए के वाहनों का अनबिका स्टॉक जमा हो गया है। इंडियन फाऊंडेशन ऑफ  ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के एस.पी. सिंह के अनुसार वाहन बीमा दरों में लगातार भारी बढ़ौतरी से भी वाहनों की बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वाहन बीमा दरों का निर्धारण बाजार पर नहीं छोड़े जाने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है।

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पिछले वर्ष के मुकाबले 3000 कारें कम बिकीं
वर्ष 2019 के पहले 6 महीनों में 15,000 से 17,000 कारें बेची गईं जबकि पिछले साल 20,000 कारें बिकी थीं। लग्जरी कारों की कार्यगुजारी बाकी उद्योग के मुकाबले बदत्तर थी। यह व्यवहार भारत के लिए अनोखा है, जहां इस क्षेत्र की कारगुजारी दूसरों से कहीं आगे है। जनवरी-जून 2019 के अर्से दौरान यात्री वाहनों की समूची बिक्री में 10 प्रतिशत की कमी होने का अंदाजा है जबकि साल की शुरूआत लग्जरी क्षेत्र में कुछ सुस्ती के साथ हुई और बिक्री में मामूली कमी रही।

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दूसरी तिमाही अप्रैल से जून का समय कहीं ज्यादा बदत्तर था, जब 6,500 से 7,000 कारें कम बिकीं जोकि खरीदो-फरोख्त में 30 प्रतिशत की कमी थी। नए मॉडल आने व दूसरे डीलरों का विस्तार किए जाने के बावजूद मांग को घटने से रोकने में सहायता नहीं मिली। मर्सडीज बेंज भारत के प्रबंधकीय निदेशक मार्टिन सकवैंक ने तीसरी तिमाही में बिक्री के सिलसिले की बहाली की आशा की है, चाहे उन्होंने भविष्यवाणी की है कि मार्कीट के हालात चुनौती भरे बने रहेंगे।

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