4 साल केजरीवाल- तूफान सी हुंकार भर रेगिस्तान में मिराज जैसा रहा दिल्ली सरकार का सफर

  • Updated on 2/14/2019

नई दिल्ली/श्वेता राणा। 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी के 4 साल पूरे हो जाएगें। 'पांच साल केजरीवाल' इस नारे के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए इस पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीत कर अपनी कामयाबी का परचम लहराया। यह पार्टी भ्रष्ट व्यवस्था, बदनाम नेताओं और घिसी पिटी राजनीति से ऊबे हुए लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बन कर सामने आई।

इस सरकार को सत्ता में आए अब 4 साल होने जा रहे हैं, लेकिन क्या आम आदमी पार्टी से सही में आम लोगों की पार्टी साबित हुई है जैसा उसने वादा किया था? क्या बदलाव की किरण जो केजरीवाल ने दिखाई थी उसकी चमक कहां फीकी पड़ी? आइए एक नजर डालते हैं इन 4 सालों में हुई केजरीवाल सरकार में उथल-पुथल पर। 

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49 दिनों तक बनाई सरकार
पार्टी ने शुरुआत में कई गलतियां करी, 49 दिनों तक सत्ता में रहने के बाद अचानक सत्ता छोड़ने पर पार्टी के समर्थकों में मायूसी छा गई थी। केजरीवाल को भारी आलोचना सहनी पडी, लोगों ने उन्हें भगौड़ा करार दे दिया था। 

ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली सरकार छोड़ने के पीछे केजरीवाल का बस ये लॉजिक था कि वब केंद्र में आकर सत्ता चलाना चाहते थे, जिसके लिए पार्टी ने लोकसभा में 440 उम्मीदवार भी खड़े किए थे। इसे उनकी एक भूल भी कहा जा सकता है क्योंकि पार्टी ने केवल 4 सीटों पर जी हासिल की थी और वो भी पंजाब से।

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अपनो की बेरुखी
केजरीवाल सरकार अपनी पार्टी की बेरुखी से जूझती दिखी। आम आदमा पार्टी और कुमार विश्वास के बीच तनातनी काफी समय से चल रही थी, लेकिन इस आग को हवा तब मिली जब कुमार विश्वास को राजस्थान चुनाव होने से पहले ही राजस्थान प्रभारी के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह दीपक बाजपेयी को दे दी गई थी। 

राज्यसभा सांसद नहीं बनाए जाने पर पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर दिखा चुके विश्वास को राजस्थान प्रभारी पद से हटाने की घोषणा एक सम्मेलन में हुई थी। हालांकि अभी कुमार पार्टी में हैं लेकिन वे केवल पार्टी के राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य रह गए हैं।

वहीं पहले केजरीवाल के बेहद करीबी पत्रकारिता छोड़ नेता बने आशुतोष ने  पार्टी का साथ छोड़ दिया था उसके कुछ दिनों बाद खबर आई की पार्टी के एक और अहम सदस्य आशीष खेतान ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

पत्रकार से नेता बने ये दोनों शख्स पहली बार राजनीति में आए थे। माना जा रहा था कि दोनों नेताओं की अहमहियत पार्टी में कम होती जा रही थी, जिसकी वजह से दोनों ने पार्टी से किनारा कर लिया। आम आदमी पार्टी की सियासत पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना था कि केजरीवाल द्वारा कभी अपने बेहद करीबी रहे आशुतोष और आशीष खेतान को अनदेखा करना ही उनके इस्तीफे का कारण बना।

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बेहतर सर्विस की दी सौगात
इस पार्टी को इसकी उपलब्धियों से वंचित करना भी गलत होगा। खासतौर पर आम लोगों से स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर इस पार्टी को तारीफ मिलती रही है। लोगों का मानना है कि पहले के मुकाबले दिल्ली के सरकारी अस्पताल और स्कूलों का काम बेहतर हुआ है। 

वहीं दूसरी और केजरीवाल सरकार ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली सचिवालय में डोरस्टेप डिलीवरी का शुभांरभ भी किया था, जो दिल्लीवासियों के लिए काफी फायदेमंद रही।

इस प्रस्ताव के तहत 40 सेवाओं को शामिल किया गया है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और नए वॉटर कनेक्शन भी शामिल हैं। इस सर्विस को पहले दिन लोगों से काफी अच्छा रेस्पॉन्स मिला था। लॉन्च होने के पहले आठ घंटे में करीब 21 हजार दिल्लीवासियों ने इस सर्विस के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था।

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