Tuesday, Jun 18, 2019

बिहार में चमकी बुखार का कहर जारी, 68 बच्चों की हुई मौत

  • Updated on 6/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बिहार में चमकी बुखार (Chamki Bukhar) का कहर तेजी से बढ़ता ही जा रहा है।अब तक 24 दिनों में 68 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस तरह बढ़ रहे बुखार के प्रकोप को सरकार (Government) काफी गंभीरता से ले रही है। 

बता दें कि, शनिवार को मरने वाले बच्चों की संख्या करीब 68 पहुंच चुकी है, जिसमें 55 बच्चों की मौत श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई है, जबकी 11 बच्चों की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार (Bihar) के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय (Health Minister Mangal Pandey) ने मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज (Shree Krishna Medical College) का दौरा कर हालात का जायजा लिया। चमकी बुखार (Chamki Bukhar) से होने वाली कुल मौत में से 55 सिर्फ इसी कॉलेज में हुई है। बाकी 11 बच्चों की मौत मुजफ्फरपुर के ही केजरीवाल हॉस्पिटल (Kejriwal Hospital) में हुई। इस बुखार का असर सबसे ज्यादा उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर में देखने को मिल रहा है जिसकी वजह से वहां के हालात और भी ज्यादा गंभीर हो गए हैं।

इस बीमारी को वहां के स्थानीय लोगों ने चमकी बुखार का नाम दिया है, वहीं डॉक्टर्स इस बीमारी को AES यानि की एक्टूड इंसेफेलाइटिस (Acute encephalitis) के नाम से बुलाते हैं। बता दें कि, ये एक रहस्यमयी बीमारी है जिसके उत्पन्न होने का सही कारण अभी सामने नहीं आ पाया है। माना जा रहा है कि उत्तरी बिहार (North Bihar) के 6 जिलों में इस बीमारी का आंतक बहुत तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है जिनमें मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली शामिल है।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर में तेजी से फैल रहे चमकी बुखार के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा है कि, "केंद्र के डॉक्टरों की एक टीम ने अस्पतालों का दौरा किया है जिसमें उन्होंने वहां की सरकार को सलाह दी है। मैंने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक की हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया है"।

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क्या है इस बीमारी के लक्षण 

बिहार में फैल रहे चमकी बुखार में बच्चों को तेज बुखार आने लगता है जिसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन होने लगती है। इसके बाद बच्चें बेहोश हो जाते हैं और हाइपोग्लाइसीमिया की दिक्कत हो जाती है। हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) यानि की शरीर में ग्लूकोज़ (Glucose) की मात्रा घट जाती है और शुगर लेवल कम होने से बच्चों की मौत हो जाती है।

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बता दें कि, इस सिंड्रोम (Syndrome) को बच्चों के अंदर बेहद कम मात्रा में देखा गया है। बिहार के डॉक्टर के मुताबिक इन हालातों में अगर बच्चों के शरीर में कोई भी ऐसी हरकत होने लगे तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं नहीं तो बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।

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