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सफरनामा: भारतीय राजनीति के 5 अहम चेहरे, जिन्होंने साल 2020 में बटोरी सुर्खियां

  • Updated on 12/30/2020

नई दिल्ली/ धीरज सिंह। साल 2020 (Year 2020) में एक तरफ जहां कोरोना संकट ने दुनियाभर को प्रभावित किया। वहीं देश की राजनीति भी लगातार गर्म रही। एक तरफ जहां कोरोना में सरकार के परफॉर्मेंस को लेकर बात हो रही थी तो वहीं दूसरी ओर बिहार व दिल्ली चुनाव और हैदराबाद निगम चुनाव के परिणामों ने भी काफी सुर्खियां बटोरी। साल के अंत में जम्मू कश्मीर में डीडीसी चुनाव ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन चुनाव परिणामों ने कई राजनेताओं को एक अहम पहचान दी। आइए जानते हैं साल 2020 में देश के 5 सबसे प्रभावित करने वाले नेताओं के बारे में...

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जेपी नड्डा
बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के पीछे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बड़ा हाथ रहा है। साल के शुरूआत में नड्डा को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल का शुरूआती चुनौती दिल्ली विधानसभा चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव था। दिल्ली में बीजेपी की पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबले बेहतर परिणाम तो मिली लेकिन अपेक्षित परिणाम से पार्टी पीछे रह गई। इस चुनाव सीख लेते हुए जेपी नड्डा ने कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव का मोर्चा संभाला और पार्टी को बेहतर स्थिति में पहुंचाने के साथ-साथ नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने में एक अहम भूमिका भी नहीं।

इसके अलावा राजस्थान के निकाय, केरल और गोवा के पंचायत चुनाव में पार्टी की जीत और हैदराबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी के दूसरे नंबर की पार्टी बनने का श्रेय जेपी नड्डा को गया। जम्मू कश्मीर में डीडीसी चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की अहम भूमिका रही। साथ ही बंगाल में 2021 का विधानसभा चुनाव नड्डा के लिए बड़ा इम्तेहान होगा, जहां पार्टी मुख्य मुकाबले में नजर आ रही है।

तेजस्वी यादव
बिहार विधानसभा चुनाव में अगर किसी नेता की सबसे अधिक चर्चा हुई तो वह हैं राजेडी सुप्रीमो लालू यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी पर पार्टी को सूब की राजनीति में वापस लाने की अहम जिम्मेदारी थी। चुनाव के शुरुआत में रणनीति के मुताबिक पार्टी के बैनरों पर पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी की फोटो गायब कर दी। इस रणनीति का चुनाव फायदा भी मिला। एक तरफ जहां बीजेपी-जदयू गठबंधन के तमाम नेताओं की हेलीकॉप्टर बिहार में चक्करें काट रही थी। वहीं महागठबंधन से तेजस्वी ने अकेला ही मोर्चा संभाला था। तेजस्वी की तेज ने पार्टी को सत्ता के चौखट पर ला खड़ा कर दिया।

सचिन पायलट
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत के बाद सबकी नजर राजस्थान की राजनीति पर टिकी हुई थी। खासकर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम चर्चा का केंद्र बना। हलचल तो तब पैदा हो गई जब सूबे में अशोक गहलोत की नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ पायलट ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। पायलटल करीब 20 विधायकों के साथ गुरुग्राम में डेरा जमाए हुए थे, इस दौरान कांग्रेस और गहलोत की सांसे अटकी रही। गहलोत इससे परेशान होकर करीब एक महीने तक पार्टी विधायकों को होटल में रखना पड़ा था। हालांकि बाद में प्रियंका गांधी और राहुल की मध्यस्थता ने पार्टी में पायलट की वापसी करा दी।

अरविंद केजरीवाल
साल 2020 में अरविंद केजरीवाल ने देश की राजनीति में अपनी एक अहम पहचान बनाई। नागरिकता कानून के विरोध चल रहे प्रदर्शन के बीच दिल्ली विधानसभा का चुनाव हुआ। ऐसे में बीजेपी की रणनीति थी कि आप को इसका नुकसान पहुंचाया जाए। एक तरफ जहां बीेजेपी ने देशभर के अपने नेताओं को दिल्ली में उतार दिया। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी तमाम विरोधों के बावजूद अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर लड़ी और केजरीवाल ने बखूबी मोर्चा संभाला। पार्टी ने केजरीवाल के नेतृत्व में जबरदस्त जीत हासिल की और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

असदुद्दीन ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के लिए यह साल काफी बेहतर रहा। एक तरफ नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में ओवैसी विपक्ष में सबसे मुखर नेता रहे तो वहीं पार्टी ने अलग-अलग चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। बिहार विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने मुस्लिम बहुल सीमांचल की पांच विधानसभा चुनाव सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया तो वहीं हैदराबाद निगम चुनाव में बेहतर स्ट्राइक रेट के साथ पार्टी का मनोबल मजबूत रहा। इस कामयाबी से ओवैसी के हौसले इतने बुलंद हैं कि वो अपनी पार्टी का प्रसार अब नेशनल पॉलिटिक्स की दिशा में बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

 

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