Friday, Dec 02, 2022
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NIMHANS न्यूरोविरोलॉजी हेड का दावा- भारत की आधी आबादी दिसंबर तक हो जाएगी कोरोना संक्रमित

  • Updated on 5/29/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं। मौजूदा समय में देश में कोरोना संक्रमण के मामले 1,72,566 दर्ज किए जा चुके हैं। आने वाले समय में यह संख्या तेजी से बढ़ने के आसार बताए जा रहे हैं।

इस बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) के न्यूरोवायरोलॉजी प्रमुख और कर्नाटक हेल्थ टास्क फोर्स में नोडल अधिकारी डॉ. वी रवि ने अनुमान लगाया है कि आने वाले कुछ महीनों में, हो सकता है कि दिसंबर तक भारत की आधी आबादी कोरोना संक्रमण से ग्रस्त हो सकती है!

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आधी आबादी को संक्रमण
डॉ. रवि का अनुमान है कि लॉकडाउन 4।0 के हटने के बाद कोरोना संक्रमण अधिक तेजी से फैलने के आसार नजर आ रहे हैं। 31 मई के बाद लॉकडाउन हटने पर या उसमें ढील देने पर कोरोना का सामुदायिक प्रसार देखने को मिलेगा।

डॉ. रवि कहते हैं कि आने वाले दिसंबर तक भारत की आधी आबादी को कोरोना संक्रमण हो जाएगा और इसमें अजीब बात ये है कि 90% लोगों को इस बात का पता ही नहीं होगा कि वो कोरोना संक्रमित हैं।

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आने वाला है मुश्किल समय
उन्होंने कहा कि इनमें से 5 से 10% मामले ऐसे होंगे जिन्हें ऑक्सीजन के हाई फ्लो के साथ इलाज करना होगा और केवल 5% मरीजों को वेंटीलेटर के सपोर्ट की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही लॉकडाउन 4.0 खत्म होने वाला है ऐसे में राज्यों को चिकित्सा से जुड़े बुनियादी ढांचे को सुधारना होगा और आने वाली गंभीर परिस्थितियों के लिए मेडिकल सेवाओं को तैयार करना होगा।

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जल्द करने होंगे बेहतर उपाय
डॉ. रवि का सुझाव है कि आने वाले कोरोना चरम से बचने और सुरक्षा के लिए देश में जल्द से जल्द प्रयास करने होंगे। इसके लिए पीएम मोदी के आदेशानुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने सभी राज्यों के प्रत्येक जिले में कम से कम दो कोरोना परीक्षण प्रयोगशालाएं बनाने का निर्देश दिया है।

इसी आदेशानुसार 60 प्रयोगशालाओं के लक्ष्य तक पहुंचने वाला कर्नाटक देश का पहला राज्य बन चुका है। बेंगलुरु में 60 प्रयोगशालाएं पूरी होने वाली है। इनमें से 30 जिलों के लिए काम करेंगी।

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वायरस के साथ रहना सीखें
डॉ. रवि ये भी कहते हैं कि भारत में मृत्यु दर कम है, 3 से 4% की दर है जबकि अकेले गुजरात में 6% है। लेकिन अगर मेडिकल सेवाएं नहीं मिली तो ये दर आगे बढ़ सकती है। कोरोना वायरस सार्स, इबोला जैसा खतरनाक और जानलेवा नहीं है इसलिए इसके साथ रहने की आदत डालनी होगी।

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