Wednesday, Aug 10, 2022
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इन 6 तरीकों से बढ़ सकती है देश में नौकरियों की सम्भावनाएं?

  • Updated on 10/14/2017

Navodayatimes

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दुनिया में भारत जैसी तेजी से बढ़ती और सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति कोई दिखाई नही देती है। इस समय इसे पटरी पर बनाए रखने के लिए जरुरी है कि नई नौकरियां पैदा की जाएं। इसके लिए नीति निर्माताओं को एक सूत्र में बंधी ऐसी पॉलिसी लानी होगी जो सभी सेक्टरों को आपस में जोड़े साथ ही देश के सामाजिक ढांचे में भी सुधार करे। सरकार के कड़े प्रयासों से ही देश में नौकरियां पैदा होगीं। इसके लिए हम यहां पर बात करते हैं कुछ ऐसे कदमों की जिसको अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से नई नौकरियां जोड़ी जा सकती हैं।

भारत का सबसे ज्यादा बंटा हुआ कामगार वर्ग जिसे अगर हिस्सों में बांटे तो तीन वर्ग ऐसे हैं जिसपर सबसे ज्यादा जरुरत है ध्यान देने की। तेजी से बढ़ता शिक्षित युवा वर्ग, अशिक्षित लेकिन कृषि से जुड़ा वर्ग जो देश में कृषि- संकट से अलग होना चाहता है और तीसरा वर्ग है युवा महिलाओं का जो पहले से कहीं ज्यादा पढ़ा लिखा है। इन सभी की हिस्सेदारी को सुनिश्चित करना बेहद जरुरी है। 

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पहला: 
वैसे पिछले कुछ तिमाही को छोड़ दें तो अर्थव्यवस्था में ग्रोथ लगातार हो रही है लेकिन ग्रोथ के पैटर्न में समस्या है। आर्थिक सुधार के लिए सेवाओं के क्षेत्र पर काफी काम किया गया है लेकिन अब जरुरत है कि निर्माण या औद्योगिक क्षेत्र पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की क्योंकि निर्माण से अर्थव्यवस्था में उत्पाकता बढ़ती है। इसके लिए सबसे पहले एक बेहतर औद्योगिक और व्यापार नीति की जरुरत है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि ये इन औद्योगिक नीतियों को आयात नियमों के साथ ऐसे जोड़ा जाएं जिससे बेहतर परिणाम मिलें। कई बार ज्यादा आयात निर्माण को नुकसान पहुंचाता है। ऐसा लगभग कई सालों तक होता रहा है। 

दूसरा: 
दूसरा प्रयास ये किया जाना चाहिए कि श्रम आधारित उद्योगों के लिए स्पेशल पैकेज की व्यवस्था की जाए। भारत में श्रम आधारित उद्योगों में फूड प्रोसेसिंग, लैदर और जूता उद्योग, लकड़ी और फर्नीचर उद्योग, टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग हैं जिनपर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा और जरुरत के हिसाब से पैकेज की व्यवस्था करनी होगी।

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तीसरा: 
नई नौकरियां पैदा करने के लिए जरुरी है कि छोटे, मंझले और सूक्ष्म उद्यमों का संगठित विकास किया जाए। देश का एक बड़ा असंगठित क्षेत्र इनसे जुड़ा है। इसमें 1350 नए इकाईयां और 4000 पारम्परिक इकाईयां हैं। इसमें हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रमुख है। 

चौथा: 
इसके बाद शहरी विकास को इन असंगठित इकाईयों से जोड़ना जिससे और नौकरियां पैदा हो। देश में शहरी विकास मंत्रालय पहले ही काम कर रहा है जिससे गैर कृषि नौकरियां बढ़ेंगी। 

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पांचवा: 
ये जरुरी कदम हो सकता है सरकार का, महिलाओं पर फोकस करना। देश में बड़ी संख्या में लड़कियां उच्च शिक्षा पा रही हैं लेकिन नौकरियों से काफी दूर हैं या फिर नौकरियां ढूंढ नहीं पा रही हैं। सरकार के लिए जरुरी है कि महिलाओं को बेहतर वर्कफोर्स के तौर पर देखना और उनमें स्किल विकसित करना ताकि शिक्षा के बाद नौकरी करने के लिए भी तैयार रहें। नौकरियों से ना जुड़ पाने की वजह सिर्फ स्किल्स ही नहीं बल्कि सामाजिक व्यवस्था भी है जिसमें लड़कियों को शिक्षित तो किया जा रहा लेकिन परिवार और समाज नौकरी करने के लिए प्रेरित नहीं करता है। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना होगा।

छठां: 
इसके अलावा तरीका हो सकता है हेल्थ, शिक्षा, पुलिस और न्यायपालिका में सरकारी निवेश करने का जिससे सरकारी नौकरियां पैदा हो। सरकारी निवेश ना होने से प्राइवेट हेल्थ सेक्टर तेजी से बढ़ता है जो नौकरियां तो पैदा करता है लेकिन जन सेवाओं में लापरवाही करता है। प्राइवेट हेल्थ सेक्टर के बढ़ने से नुकसान ये होता है कि आम आदमी की जेब पर बोझ ज्यादा पड़ता है क्योंकि ये सेवाएं जरुरत से ज्यादा महंगी होती हैं। 

इन सभी तरीकों पर अगर नीति निर्माता ध्यान दें तो अर्थव्यवस्था की गिरती स्थिति को संभाला जा सकता है और नौकरियों में लगातार आती कमी को रोका जो सकता है। जब नौकरियां बढ़ेगी तो जीडीपी और अर्थव्यवस्था भी इसके साथ मजबूत होगी।


 

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