Monday, Nov 18, 2019
7 important things about the historic decision of supreme court on ayodhya case

जानें, अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की 7 अहम बातें

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/ नीरज कुमार। सदियों से चली आ रही अयोध्या राम जन्म भूमि- बाबरी मस्जिद विवाद (Ram Mandir-Babri Masjid Case) मामला आखिरकार सुलझ ही गया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज यानि शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन का हक न्यास को देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। आईए आपको बताए राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट के 7 अहम फैसले....

RAMJANMBHOOMI

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1045 पन्नों में सुनाया ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आज सबसे पुरानी विवाद राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) पर 1045 पन्नों में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इनमें 929 पन्नों में कोर्ट का आदेश है, बाकी पन्नें इससे जुड़े हैं। बता दें इसमें प्रमुख रूप से दोनों पक्षों के बीच अयोध्या की 1500 गज जमीन का जिक्र किया गया है।

विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने करीब 130 साल से चले आ रहे इस अयोध्‍या जमीन विवाद पर  फैसला सुना दिया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश सुनाया है। वहीं मुस्लिम पक्ष यानि सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है।
 
केंद्र सरकार 3 महीनें में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का करेगी गठन

सीजेआइ  रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्‍ट के निमार्ण का आदेश ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार तीन महीने में स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए। यही ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण करेगा और इसकी निगरानी भी रखेगा।

सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए दी जाएगी 5 एकड़ जमीन

सुप्रीम कोर्ट प्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थल राम जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिये 5 एकड़ भूमि आवंटित की जाए। कोर्ट के आदेश के अनुसार विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि (Ramjanmbhoomi) न्यास का हक। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र या राज्य सरकार को अयोध्या में ही उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन देने का आदेश दिया है।

मुस्लिमव पक्ष जमीन का दावा साबित करने में रही नाकाम 

सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने कहा विवादित स्‍थल पर मस्जिद होने का कोई साक्ष्य प्रमाण नहीं मिले। कोर्ट ने फैसले में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भी यह सामने आया कि मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी।

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज 

अयोध्‍या विवादित जमीन पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम फैजाबाद कोर्ट के 1946 के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राम लला विराजमान को जमीन का मालिकाना हक देने के साथ ही निर्मोही अखाड़े के दावे को भी खारिज कर दिया है। जिसकी मेन वजह निर्मोही अखाड़े की देरी से याचिका दायर की थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने माना हिंदू बाहरी बरामदे में करते थे पूजा अर्चना

सुप्रीम कोर्ट ने आज यानि शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा पूजा की जाती थी। अभिलेखों में दर्ज साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था। इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।

बता दें कि अयोध्या (Ayodhya) जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देश के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले से पुरा देश खुश है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने समस्त देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। आपको बता दें कि कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश सुनाया है। इसके आलवा मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाने को कहा है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा पूजा की जाती थी। अभिलेखों में दर्ज साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था। वहीं फैसला हिंदुओं के पक्ष में आने के बाद मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले में कई विरोधाभास है, इस वजह से हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट है।

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