Sunday, Jan 23, 2022
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प्रदर्शनी के माध्यम से भारत छोडो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ

  • Updated on 9/1/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। आजादी के अमृत महोत्सव समारोह के तहत राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा एक यात्रा के रूप में भारत छोडों आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह प्रदर्शनी 8 नवंबर 2021 तक आयोजित होगी। इसका समय सुबह 10 बजे से शाम साढे 5 बजे तक आम जनता के लिए खोली जाएगी। इस प्रदर्शनी में भारत छोडो आंदोलन के दौरान की घटनाओं के चित्र, आधिकारिक व सार्वजनिक दस्तावेजों व अभिलेखों, निजी पत्रों, व अन्य  प्रासंगिक सामग्री, एलईडी मानचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
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द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को शामिल करना व मंत्रालयों का इस्तीफा देना
इस दौरान लोगों को कई रोचक जानकारी मिलेगी। यहां भारत छोडो आंदोलन की प्रमुख परिस्थितियां व अंग्रेजों ने भारतीय नेताओं की सहमति के बिना 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की भागीदार की घोषणा की। जिसके कारण ब्रिटिश भारत के प्रांतों के मंत्रालयों ने इस्तीफा दे दिया जोकि यहां देखने को मिलेगा। वहीं यहां आपको 22 अप्रैल 1942 को एक पत्र देखने को मिलेगा जिसके माध्यम से क्रिप्स मिशन पर महादेव देसाई की राय को दर्शाया गया है। एलईडी आधारित प्रदर्शनी की प्रस्तुति में कोई भी व्यक्ति किसी भी घटनाओं को अपनी इच्छानुसार जान सकता है, यह तकनीक प्रदर्शनी में प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ-साथ प्रदर्शनी को दिलचस्प बनाने में भी मदद करती है।
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द सीक्रेट प्रदर्शनी
उस समय के गुप्त दस्तावेजों को प्रदर्शित करते हुए कुछ अज्ञात और रोचक तथ्यों पर यहां प्रकाश डाला गया है। क्रिप्स मिशन पर मुस्लिम लीग की स्थिति को दर्शाने वाला ब्रिटिश भारत का इंटेलिजेंस ब्यूरो दस्तावेज यहां दिया गया है। यहां कुछ कविताओं को प्रदर्शित किया गया है जोकि साहित्य प्रेमियों को आकर्षित कर सकती है। इस सेक्शन को द पोइट्री नाम दिया गया है। जिसमें एक कविता क्या चाहते हैं के शीर्षक से भारतीयों की ब्रिटिश गुलामी से मुक्त होने की आकांक्षाओं पर प्रकाश डालती है।
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द कॉल
महात्मा गांधी ने करो या मरो का आह्वान किया था। प्रदर्शनी में दर्शाए गए दस्तावेज दर्शकों को हमारे नेताओं द्वारा किए गए बलिदानों के प्रति श्रद्धा भाव से भर देते हैं। करो या मरो के आह्वान ने भारत छोड़ो आंदोलन का शुभारंभ किया और अगले दिन महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदर्शनी आंदोलन के दौरान समाचार पत्रों द्वारा निभाई गई भूमिका पर प्रकाश डालती है। द रेवलूशन, कई महत्वपूर्ण नेताओं की गिरफ्तारी के कारण ऊषा मेहता और राम मनोहर लोहिया द्वारा गुप्त और भूमिगत रेडियो स्टेशन की शुरुआत हुई। प्रदर्शनी इस कथन को सही तरीके से दर्शाती है कि क्रांति को कारावास में कैद नहीं किया जा सकता।
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द सैक्रफाइस व द पैरलेल गवर्नमेंट
द सैक्रफाइस में सैन्य और पुलिस कार्रवाई में मारे गए और घायल लोगों की संख्या के रिकॉर्ड को दिखाते हुए आंदोलन के दौरान बलिदान और संघर्ष को दर्शाती है। वहीं द पैरलेल गवर्नमेंट में उत्तर प्रदेश में बलिया सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता की घोषणा को दर्शाने वाली प्रस्तुति प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण है।

कुछ अन्य विशेषताएं:
-अखबार की रिपोर्ट एक दिलचस्प घटना दिखाती है जहां विंस्टन चर्चिल के नाम से गधों को शहर में छोड़ दिया गया था।
-प्रदर्शनी में दर्शायी गई प्रबुद्ध प्रस्तुतियाँ अभिनव स्वरूप है जिन्हें तीन आयामी घटनाओं के रूप में दिखाया गया है।

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