Monday, Jan 21, 2019

तबादले की सूचना पाकर 90 प्रोफेसर हुए बीमार, तबादले से बचने को बनाया बीमारी का बहाना

  • Updated on 1/7/2019

देहरादून/ब्यूरो। प्रदेश में 90 प्रोफेसर्स के लिए तबादले की सूचना(तबादला नहीं) ऐसी घातक साबित हुई कि वें बीमार पड़ गये। कोई दिल पकड़कर बैठ गया तो किसी को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उच्च शिक्षा विभाग ने मेडिकल बोर्ड बिठाया तो रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। इन शिक्षकों को यें घातक बीमारियां अचानक और पहली बार हुई थीं।

दरअसल पूरा मामला ये है कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय डिग्री कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षकों के तबादले किए जाने थे। इसलिए सूची तैयार हो रही थी। आमतौर पर तबादला सूची बनाते समय ऐसे शिक्षकों को छोड़ दिया जाता है जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हों।

तबादला सूची बनने से पहले ही विभाग के पास शिक्षकों की बीमारियों के अनेक मामले पहुंच गये। बड़ी संख्या में अचानक शिक्षक के बीमार हुए तो अधिकारियों को शक हुआ। विभाग की ओर से मेडिकल बोर्ड बनाया गया। बोर्ड ने रिपोर्ट दी कि इनमें से 90 शिक्षकों की बीमारी की पहले से कोई हिस्ट्री नहीं है। इन शिक्षकों को पहली बार यह बीमारी हुई। इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने माना कि इन शिक्षकों ने तबादले से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाया था।

इनसेट

तबादले के बाद 30 मेडिकल पर गए

 इस सत्र में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 164 शिक्षकों के तबादले किए गए थे। इनमें से 134 शिक्षकों ने निर्धारित समय सीमा में नये कॉलेजों में ज्वाइन कर लिया था लेकिन 30 मेडिकल लीव पर चले गये थे। मेडिकल लीव लेने वाले शिक्षकों ने काफी दिनों बाद कॉलेजों में ज्वाइनिंग दी। इस मामले में भी माना गया कि शिक्षक नए कॉलेज में जाने से बचने के लिए मेडिकल लीव पर गये थे।

वर्जन

अधिकारियों की ओर से बताया गया था कि तबादले की सूची जारी होने लगी तो अनेक शिक्षक बीमार पड़ गये। तबादले के बाद 30 शिक्षक मेडिकल लीव पर चले गये। दो शिक्षक तो मेरे पास आकर यहां तक बोले कि अगर उनका तबादला नहीं रोक सकते तो वीआरएस दे दीजिए। इस पर ध्यान देने की जरुरत है। इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है।

- धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री

 

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