Tuesday, Feb 18, 2020
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95 गांवों में होगा लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत निर्माण, 22 लाख से अधिक आवास होंगे तैयार

  • Updated on 10/13/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लैंड पूलिंग पॉलिसी पर डीडीए बोर्ड की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर अंतत: केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय ने मुहर लगा दी। इसके साथ ही पॉलिसी की जद में 95 गांवों को शहरीकृत ग्रामीण इलाके का दर्जा प्राप्त हो गया है।

अब यहां शहरी विस्तार के लिए शहरी क्षेत्रों में लागू नीति का पालन आसानी से किया जा सकेगा। योजना है कि आने वाले समय में दिल्ली में इस पॉलिसी के तहत करीब 22 लाख से अधिक आवास तैयार किए जा सकेंगे। जिसमें गरीब व मध्यम आय वर्ग के लोगों को भी अपनी जेब और पसंद के आधार पर आवास सुविधा मिलेगी। 

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मंत्रालय ने इस योजना में किये गए संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को स्वीकार करने के साथ ही अधिसूचित करते हुए कहा है कि इससे इन इलाकों में पानी, बिजली व अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने में सुविधा होगी। स्मार्ट सिटी मानकों के आधार पर यहां पर्यावरण व अन्य बातों का ध्यान भी रखा जा सकेगा।

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पॉलिसी में निजी क्षेत्र अथवा किसानों या फिर प्रमोटरों द्वारा जमीन को पूल करके विकसित करने के लिए डीडीए को सुपुर्द करेगा। डीडीए केवल सुविधाकार की भूमिका निभाएगा। इसमें न्यूनतम 2 हेक्टेयर भूमि की अनिवार्यता रखी गई है।

अधिकारी के अनुसार दो अलग-अलग श्रेणियों में जमीन वापसी को संशोधित करते हुए एक समान किया गया है। इसमें अब कंसोर्टियम पूल की जमीन का 60 फीसदी हिस्से का प्रयोग रिहायशी,कॉमर्शियल, सरकारी व अद्र्ध सरकारी कार्य में कर सकेगा।

मंत्रालय ने लगाई मुहर पॉलिसी का लाभ लेने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शीघ्र
लैंड पूलिंग पॉलिसी को धरातल पर उतारने के लिए मंत्रालय ने इस योजना का लाभ लेने वालों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो प्रणाली को जल्द शुरू करने के लिए कहा है। बताया जाता है कि मंत्रालय की ओर से दिये गए निर्देश के तहत डीडीए ने इसके लिए तैयारी आरंभ कर दी है।

इसमें कंसोर्टियम बनाने वालों को ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा और उनके पास डीडीए की ओर से जवाब भी ऑनलाइन भेजा जाएगा। जवाब मिलने के बाद एनओसी से लेकर विकसित भूमि पर निर्माण से जुड़े नक्शे इत्यादि दस्तावेजों को जमा करने के लिए प्रमोटरों, किसान समूह को भटकना नहीं होगा। बुनियादी सुविधाओं की लागत को वहन करने के लिए डीडीए प्रमोटरों, डेवलपरों अथवा किसान समूह से किस्तों में ईडीसी(बाहरी विकास शुल्क)लेगा। 

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यह शुल्क पूल की गई भूमि के पूरे क्षेत्र पर लिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए ईडब्ल्यूएस व किफायती आवास के लिए 15 प्रतिशत अथवा उससे अतिरिक्त एफएआर(फ्लोर एरिया रेशियो)का लाभ भी डेवलपर को मिलेगा।

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