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a delegation appeal to the president action should be taken against caa violence

प्रबुद्ध नागरिकों ने की राष्ट्रपति से CAA के विरोध में हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की अपील

  • Updated on 1/24/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस बीच एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) से आग्रह किया कि वह सीएए के विरोध के नाम पर हिंसा, आगजनी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

 

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प्रतिनिधिमंडल ने की राष्ट्रपति से मुलाकात
राष्ट्रपति से अपील करले वाले इन प्रबुद्ध नागरिकों में शीर्ष सरकारी एवं संवैधानिक पदों से सेवानिवृत हुए लोग एवं बुद्धिजीवी आदि शामिल हैं। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के अध्यक्ष और सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक तत्व संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनकारियों को प्रश्रय दे रहे हैं और इस अशांति का ‘बाहरी आयाम’ भी है।

उन्होंने हालांकि संशोधित नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ प्रदर्शन भड़काने को लेकर किसी दल या व्यक्ति का नाम नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ‘द्वेषपूर्ण’ माहौल पैदा करने के लिए कुछ संगठनों की समाज में विभाजन पैदा करने की हरकत से वह चिंतिंत है। उसने कहा कि यदि आंदोलन शांतिपूर्ण रहता है और लोगों को असुविधा नहीं होती है, तो उसे इस आंदोलन से कोई एतराज नहीं है।

CAA विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों पर हो कार्रवाई 
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उच्च न्यायालयों के 11 पूर्व न्यायाधीश, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और पूर्व राजनयिक समेत 72 पूर्व नौकरशाहों , 56 शीर्ष पूर्व रक्षा अधिकारियों, बुद्धिजीवियों, अकादमिक विद्वानों और चिकित्सा पेशेवरों के हस्ताक्षर हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रबुद्ध नागरिक चाहते हैं कि केंद्र पूरी गंभीरता से इस मामले पर गौर करे और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करे एवं ऐसी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करे। उसमें कहा गया है कि केंद्र की नीतियों के विरोध का दावा करने वाले इन इन प्रदर्शनों की रूपरेखा वाकई भारत के तानेबाने नष्ट करने और उसकी एकता एवं अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली बनायी गयी है। उसमें कहा गया है कि पूरे देश में डर का जो माहौल खड़ा किया जा रहा है, वह राजनीत से प्रेरित जान पड़ती है।

ज्ञापन में कहा गया है, ‘सीएए भारतीय नागरिकों पर कोई असर नहीं डालता, इसलिए नागरिकों के अधिकारों और आजादी पर खलल डालने का दावा सही नहीं ठहरता।’ इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण, केरल के पूर्व मुख्य सचिव सी वी आनंद बोस, पूर्व राजदूत जी एस अय्यर, पूर्व रॉ प्रमुख संजीव त्रिपाठी, आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक एस के कैन, दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त आर एस गुप्ता, पूर्व सेना उपप्रमुख एन एस मलिक जैसी कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।

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31 दिसंबर 2014 तक आए लोगों को गैरकानूनी नहीं माना जाएगा
इस कानून के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो सदस्य 31 दिसम्बर 2014 तक पाकिस्तानबांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं और जिन्हें उनके देश में धार्मिक उत्पीडन का सामना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा, बल्कि भारतीय नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार को राज्यसभा द्वारा और सोमवार को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।

इन राज्यों में लागू नहीं होगा CAA
लोकसभा में बिल को लेकर हो रही जोरदार बहस के बीच अमित शाह में साफ कर दिया कि ये बिल अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड ( दीमापुर को छोड़कर), त्रिपुरा (करीब 70%) के साथ पूरे मेघालय में यह कानून मान्य नहीं होगा। उन्होंने बिल को लेकर कहा, उत्तरपूर्व के राज्यों को सीएबी ने डरने की कोई जरूरत नहीं है। 

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नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों में संशोधन
बता दें कि नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों में संशोधन कर ये बिल लाया गया है। इस संशोधन में मुख्यत: किसी को भी नागरिकता किस आधार पर दी जाए इन प्रवाधानों में सोंशधन किया गया है। इस प्रकार के संशोधन के द्वारा मुस्लिम राष्ट्रों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बिना किसी वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया जाएगा। जिसके चलते गैर मुस्लिम लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

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