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a farmer from haryana earns millions with the help of balers sohsnt

ऑस्ट्रेलिया से वापस आया युवक साथ लाया जबरदस्त प्लान, अब होती है लाखों में कमाई

  • Updated on 11/7/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अगर कुछ कर गुजरने का जुनून सवार हो जाए तो इंसान के लिए इस दुनिया में कोई भी काम असंभव नहीं है। दरअसल, हरियाणा से कुछ ऐसा ही एक वाकया सामने आया है। अक्सर देखा जाता है कि लोग करोड़ों रुपये कमाने की इच्छा से विदेश जाते हैं, लेकिन हरियाणा (Haryana) के कैथल जिले के फराज माजरा गांव के निवासी वीरेंद्र यादव (Virendra Yadav) ने विदेश से वापस आकर देश में ही लाखों रुपये कमा कर एक नई मिसाल पेश की है।

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वीरेंद्र ऑस्ट्रेलिया में करते थे थोक सब्जी बेचने का काम

दरअसल, वीरेंद्र यादव साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया गए थे, जहां उन्होंने थोक सब्जी बेचने का कारोबार किया, लेकिन अचानक मां की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें देश वापस लौटना पड़ा। वीरेंद्र को जब डॉक्टर से पता चला कि उनकी बेटी और मां को गांव में फैले स्मॉग के कारण सांस लेने में समस्या हो रही है, तो उन्होंने उसी समय इस परिस्थिति को बदलने का मन बना लिया। वीरेंद्र ने बिना किसी देरी के कृषि विभाग के अधिकारियों से बात की और उन्हें प्रदूषण की बढ़ती समस्या से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने चार 'बेलर'  खरीदने का फैसला किया। कृषि विभाग से मिली सब्सिडी के साथ उन्होंने दो और बेलर खरीदे। देखते ही देखते वीरेंद्र का काम चल पड़ा और वे लाखों में कमाई करने लगे।

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महज दो महीने में किया 95 लाख का बिजनेस
वीरेंद्र से जब उनके इस बिजनेस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मेरे पिता पशुपालन विभाग में थे, उन्होंने ही मेरा मार्गदर्शन किया। वीरेंद्र बताते हैं कि उनके पास सिर्फ एक एकड़ जमीन थी जिसमें परिवार का गुजारा भी मुश्किल से ही हो पाता था। उन्होंने बताया कि जब ऑस्ट्रेलिया में थे तब लगभग 35 लाख रुपये तक कमा लिया करते थे, लेकिन जब से उन्होंने गांव में आकर ये नया बिजनेस शुरू किया है तब से उन्होंने महज दो महीने में ही 95 लाख का बिजनेस कर लिया, जिसमें से लागत राशि निकालने के बाद 50 लाख रुपये उनके पास बचने की पूरी उम्मीद है।

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दूसरे किसान भी कर सकते हैं ये काम
वीरेंद्र यादव के बारे में बात करते हुए कैथल के कृषि विभाग के एडीओ डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि आज वीरेंद्र की चर्चा न सिर्फ स्थानीय लोगों में हो रही है बल्कि दूर-दूर के लोग भी उनके इस काम में दिलचस्पी ले रहे हैं। डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि जिस तरह स्ट्रा बेलर पर मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि का वीरेंद्र ने सदुपयोग किया ऐसा दूसरे किसान भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा वीरेंद्र अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए न सिर्फ पर्यावरण को शुद्ध रखने में मदद कर रहे हैं बल्कि इसके जरिए लाखों की कमाई भी कर रहे हैं।

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