विज्ञान के शौक ने बनाया 16 वर्ष की आयु में करोड़पति

  • Updated on 12/5/2018

समय गोदिका 16 वर्ष की आयु में ही करोड़पति बन गया है। बेंगलूर के इस लड़के ने कोई लाटरी नहीं जीती बल्कि गत माह के शुरू में अमरीका के सान फ्रांसिस्को में आयोजित ‘ब्रेकथ्रू जूनियर चैलेंज’ नामक एक ग्लोबल कम्पीटिशन का चौथा संस्करण जीता, जिसके लिए उसे 2.90 करोड़ रुपए (4 लाख डालर) का पुरस्कार दिया गया जिसमें से वह कालेज छात्रवृत्ति के रूप में 2.50 लाख डालर (1.80 करोड़ रुपए) ले जाएगा। शेष राशि स्कूल और शिक्षकों को दी जाएगी।

हाई स्कूल स्टूडैंट्स (13 से 18 वर्ष आयु) के लिए इस कम्पीटिशन में लाइफ साइंसिज, फिजिक्स अथवा गणित पर 3 मिनट के वीडियो बनाने थे, जो पेचीदा विषयों को साधारण तरीके से व्यक्त करते। गोदिका के लिए प्रेरणा अस्थमा के साथ उनके अपने संघर्ष से आई।

बेंगलूर के नैशनल पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढऩे वाले गोदिका ने एक ऐसा वीडियो बनाया जो लाइफ साइंस में जैव-चक्रीय आवर्तन पर आधारित था। उसने पाया कि अस्थमा सुबह के समय अधिक तीव्र हो जाता है। अधिक शोध करने पर उसने पाया कि यह हमारे शरीर के भीतर 24 घंटों के चक्र (घड़ी) के कारण था।

जैव चक्रीय आवर्तन (सिर्काडियन रिदम) हमारे शरीरों को क्रम में रखता है और हमें बताता है कि अब इन का फलां समय है और हमें क्या करना है, जैसे कि रात के 11 बजे हैं और यह सोने का समय है। जैट-लैग का ही उदाहरण लें। उदाहरण के लिए आप तड़के 3 बजे जाग रहे हैं जब आपके शरीर को सोया होना चाहिए। चक्र में ये असंतुलन अथवा व्यवधान मधुमेह अथवा पागलपन का कारण बनता है।

अपने वीडियो में गोदिका ने कुछ रोचक तथ्य बताए हैं जैसे कि हृदयाघात आम तौर पर तड़के के समय क्यों होते हैं तथा क्यों अधिक ओलिम्पिक रिकार्ड दोपहर के बाद टूटते हैं। उसने बताया कि ये ऐसी चीजें हैं जो लोगों का ध्यान खींचती हैं। उसने एक आर्कैस्ट्रा की बनावट की सहायता से स्पष्ट किया कि कैसे हमारा शरीर लय से बाहर हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे केवल एक आऊट ऑफ ट्यून वाद्ययंत्र पूरी धुन को खराब कर सकता है। 

गोदिका ऑनलाइन आॢटकल्स पढ़ता था जिन्होंने शोध में उसकी मदद की। स्कूल में उसकी बायोलॉजी की टीचर ने उसकी मदद की। वह पहली कक्षा से ही स्कूली कम्पीटिशन्स में भाग लेता रहा है।

गोदिका के कुल पुरस्कार में से कक्षा 9 तथा कक्षा 10 के उसके विज्ञान के टीचरों ने 50,000 डालर (लगभग 36 लाख रुपए) जीते और 1 लाख डालर (लगभग 72 लाख रुपए) उसके स्कूल में एक अत्याधुनिक साइंस लैब बनाने के लिए दिए जाएंगे।

वह अपने इस कांसैप्ट को अन्य स्कूलों में भी ले जाने की योजना बना रहा है, विशेष कर सरकारी स्कूलों में। इसके पीछे विचार तकनीक का इस्तेमाल करके तथा स्टोरी टैङ्क्षलग के साथ एक मंच तैयार करना और इस तरीके को बढ़ावा देकर विभिन्न समुदायों तक ले जाना है।                                                                                                 ---कुमारन पी.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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