Thursday, Mar 21, 2019

हरियाणा के रास्ते दिल्ली में कांग्रेस से गठबंधन की जुगत में AAP, ये है मास्टर प्लान

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकसभा चुनावों को लेकर लगभग सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों को रण में उतार दिया है। ऐसा ही आलम राजधानी दिल्ली का भी है। दिल्ली में सत्ता पर विराजमान आम आदमी पार्टी ने भी अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करने के साथ कांग्रेस के साथ गठबंधन की खबरों पर भी विराम लगा दिया था, लेकिन इस बीच बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर कांग्रेस से गठबंधन करने को लेक

हालांकि ये अलग बात है कि ये विनती दिल्ली के लिए नहीं हरियाणा के लिए थी, लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्यों कांग्रेस की तरफ से पहले ही मुंह की खाने के बाद केजरीवाल उसी दिशा में बह रहे हैं?

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अरविंद केजरीवाल की तरफ से आया ये विनती वाला मोड आंखों को भले ही खटकता है लेकिन राजनीति की समझ रखने वाले लोग इससे भली भीति भांप रहे हैं।

कांग्रेस को अपने पाले में मिलाने में लगे केजरीवाल को अभी हाल में ही दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने दो टूक कह दिया कि आम आदमी पार्टी से कोई अलायंस नहीं होगा। अब सवाल है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो कांग्रेस से गठजोड़ के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने सारे घोड़े खोल दिए हैं?

ये है रणनीति
ऐसा नहीं है कि अरविंद केजरीवाल बुधवार को अचानक हरियाणा में गठबंधन के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाने को तैयार हो गए। इसका भी एक बड़ा कारण है। दरअसल, जेजेपी और आम आदमी पार्टी में गठबंधन की चर्चाएं हरियाणा में पिछले काफी दिन से चल रही हैं लेकिन गठबंधन किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाया है।

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केजरीवाल भलीभांति जानते हैं कि हरियाणा में गठबंधन की बात बनती है तो दिल्ली में गठजोड़ की संभावना दूर नहीं होगी, लेकिन असली समस्या ये है कि दिल्ली में कांग्रेस की कमान आज शीला दीक्षित के हाथ में है, तो हरियाणा में अशोक तंवर अध्यक्ष हैं। इन दोनों नेताओं से अरविंद केजरीवाल आखिर बात करें तो कैसे? ऐसे में केजरीवाल सीधे तौर पर राहुल गांधी को संबोधित कर रहे हैं और गठबंधन की आस जगा रहे हैं।

सीटों पर आप की विजय!
दिल्ली लोकसभा और विधानसभा में कांग्रेस की सीटों की संख्या शून्य है, पर बावजूद इसके कांग्रेस ने आप के साथ गठबंधन में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इससे यह साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस का इस कदम के पीछे बड़े राजनीतिक संकेत हैं।

यहां कांग्रेस का आप के साथ गठबंधन किए जाने का सीधा मतलब सीट शेयरिंग फॉर्म्युले पर काम किए जाने को लेकर था। दिल्ली में विधानसभा की 7 सीटें हैं और इस आधार पर 50:50 फॉर्म्युला काम नहीं कर सकता था। ऐसी परिस्थिति में किसी एक पार्टी को सीनियर पार्टनर के तौर पर अधिक सीटें मिलतीं। कांग्रेस किसी भी हाल में गठबंधन में जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार नहीं थी। 

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दूसरी तरफ कांग्रेस के पास खोने के लिए भी कुछ खास नहीं है क्योंकि लोकसभा और विधानसभा दोनों में ही उसकी शून्य सीटें हैं। आप के साथ गठबंधन का अर्थ कांग्रेस के लिए आनेवाले विधानसभा चुनावों में अपने अस्तित्व की भी लड़ाई है। कांग्रेस ने 20 साल में 15 साल यहां राज किया है और सत्ता में वापसी के लिए बेकरार है। 

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