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Interview- किसानों के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे लड़ाई, करेंगे हर संभव मदद: राघव चड्ढा

  • Updated on 12/31/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के अन्नदाता किसान के हकों की लड़ाई में दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल खुद और अपने विधायकों व सांसदों के साथ मिलकर सेवा कर रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर आम आदमी पार्टी की रणनीति और किसानों की समस्याओं पर दिल्ली जल बोर्ड के वाइस चेयरमैन, आम आदमी पार्टी के राजिन्दर नगर से विधायक, पंजाब के सह प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा से नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी ने बातचीत की।

1. किसान आंदोलन चल रहा है, आप फ्री वाई-फाई लगवा रहे हैं। किसानों को लेकर राजनीति हो रही है, क्या आपकी नजर किसान के साथ-साथ पंजाब पर है?
देश का किसान आंदोलित है, किसान अन्नदाता है, देवता है, उसकी पूजा होनी चाहिए। जितनी सेवा हो उतनी कम है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके विधायक, सांसद और वे खुद किसानों की सेवा कर रहे हैं। वहां लंगर से शौचालय तक, कंबल से लेकर पानी तक की सेवा दी गई है। हमें किसानों के लिए आखिरी सांस तक लड़ाई लडऩी है, हमें किसान भाइयों के ऐतिहासिक आंदोलन में उनका साथ देना है। हम उनकी रत्तीभर भी समस्या कम कर सके तो करेंगे। वहां इंटरनैट कमजोर है, इसलिए फ्री वाई-फाई की सेवा भी अरविंद केजरीवाल देंगे। 

2. अगर आप किसान हितैषी हैं तो दिल्ली विधानसभा में कोई बड़ा कदम क्यों नहीं उठाया, सिर्फ बिल की कॉपी फाड़ी?
ये केंद्र का कानून है, संसद ने पारित कर दिया तो वह देशभर में लागू होता है। जैसे आयकर का कानून संसद ने बनाया, उसे लागू कर दिया गया। पंजाब में भी ये कानून लागू हो गए, अगर मुख्यमंत्री के हाथ में होता कानून को लागू कर पाना या नहीं, तो फिर किसान कैप्टन साहब के महल के सामने खड़े होते और कहते कानून वापस ले लो। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में बिल की कॉपी फाड़कर यह संदेश दिया कि वह किसान और मजदूरों के साथ खड़े हैं। हम उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।

3.सत्तापक्ष कई आरोप लगा रहा है। आरोपों का सामना तो आपको भी करना पड़ सकता है?
सब आरोपों का जवाब देंगे, हम केवल सेवा दे रहे हैं, सेवादार की भूमिका में खड़े हैं, किसान को जितनी सेवा दे सकें, उतनी कम है। इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। हम कंबल दे रहे हैं, पानी, शौचालय मुहैया करवा रहे हैं और आंदोलन में बैठे किसानों की मुश्किलों को कम कर सकें तो हम खुद को सफल समझेंगे।  

4. कृषि कानूनों को लेकर कहा जा रहा है कि विपक्ष ने भ्रम की स्थिति फैलाई है। इसमें क्या आप का भी योगदान है?
भ्रम मोदी सरकार फैला रही है। मोदी सरकार इस भ्रम में थी कि देश का किसान अनपढ़ है, चुपचाप कानून लाओ, उसे लागू कर दो। बड़े उद्योगपतियों को फायदा दो, उनकी खेती छीन लो, वह सब सामने आ गया है।  अब भ्रम दूर हो गया, क्योंकि किसानों ने बता दिया कि उन्हें पढऩा आता है। भाजपा को किसान को अपमानित करना छोड़ देना चाहिए। हम ‘जय जवान-जय किसान’ वाला देश हैं, भाजपा किसान को आतंकवादी कह रही है, अपराधी कहती है। कहते हैं कि पाकिस्तान-चीन फंङ्क्षडग कर रहे हैं। किसान पाकिस्तान, चीन के समर्थन से आंदोलन कर रहा है। हम बहुत आहत हैं, इसीलिए फैसला किया है कि अगर कोई कानूनी लड़ाई लडऩा चाहे तो कानूनी मदद भी देंगे।

5. आपको पंजाब का प्रभार मिला है। क्या चुनौतियां रहेंगी, आपने अध्ययन कर लिया होगा ?
अभी मैं किसान आंदोलन पर ध्यान दे रहा हूं। तीनों कृषि कानून वापस कराने में जितना सहयोग कर सकें, करेंगे। राजनीति करने के लिए बहुत समय है, तब करेंगे। पार्टी के अध्यक्ष, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुझे ये जिम्मेदारी दी है। परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि मुझे शक्ति दें कि मैं इस भूमिका को निभा सकूं। पार्टी और पंजाब की जनता की अपेक्षा पर खरा उतर सकूं।   

6.आप के मंसूबे क्या हैं। पंजाब विधानसभा में जब बिल लाए जा रहे थे तब उनके साथ खड़े थे। आखिरी समय में पीछे हट गए कि हमने बिल नहीं पढ़े, क्या ये द्वंद्व की स्थिति नहीं है?
कैप्टन साहब ने जो संशोधन लाने की कोशिश की, क्या उससे पंजाब के किसान की समस्या का हल हो गया ? अगर वह सही होता, केंद्र के कानून को लागू होने से रोक सकता तो क्या किसान दिल्ली के दरवाजे पर मोदी को ललकार रहा होता? वह अपने खेत-खलिहान में होता। आम आदमी पार्टी ऐसे ढोंग में विश्वास नहीं रखती। कैप्टन साहब का ढोंग पंजाब की जनता के सामने आ चुका है। वह काले कानून बनाने वाली कमेटी में होते हैं, पहले मंजूरी देते हैं। अपने मैनिफैस्टो में लिखते हैं कि एम.एस.पी., मंडी खत्म करेंगे पर जैसे ही किसान आंदोलित होता है तो अपने नफे-नुक्सान के लिए कानून में संशोधन लाकर किसानों की आंख में धूल झोंकने की कोशिश करते हैं। ये संशोधन नहीं धोखा है।

7. सिंघू बॉर्डर पर वाई-फाई लगवा रहे हैं। कहीं 2022 को लेकर आपकी नजर पंजाब पर तो नहीं?
सिंघू बॉर्डर पर हमने किसान भाइयों से उन जगहों के बारे में पूछा था, जहां इंटरनैट कमजोर है। उनके  बताए गए स्थानों पर वाई-फाई लगवा रहे हैं। हमारा मानना है कि किसान वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवार से बात करना चाहें तो कर सकें। इंटरनैट किसान की पहुंच में आएगा तो भाजपा जो झूठ फैला रही है वह भी उसके सामने आएगा और उसका जवाब भी देगा। किसान हल चलाना भी जानता है तो वह सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा का पर्दाफाश करना भी जानता है। इसलिए वाई-फाई की सुविधा दी जा रही है।

8. पंजाब में सत्ताधारी दल बहुत मजबूत स्थिति में है। उसकी छवि को देखते हुए लगता नहीं है कि आप की चुनौती बहुत बढ़ जाएगी?
आज पंजाब की जनता खासतौर पर किसान समझ चुके हैं कि कांग्रेस, अकाली दल, भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। इन्होंने पंजाब को अंधेरे में धकेला है। जनता खुशहाल पंजाब के लिए आम आदमी पार्टी को मौका देना चाहेगी। आंदोलन में समर्पण के साथ किसानों के साथ आम आदमी पार्टी खड़ी हुई। अकाली किस मुंह से वोट मांगेंगे, उन्होंने तो तीनों काले कानून बनाए, वे मोदी सरकार का हिस्सा रहे। कैप्टन ने उस समिति में सहमति दर्ज करवाई, एक साल तक देश के किसान को पता तक नहीं चलने दिया कि ऐसे कानून आ रहे हैं। जुलाई, अगस्त में हुई बैठकों में कैप्टन साहब बैठे थे और अब जनता समझ चुकी है। इसलिए मुझे लगता है कि इस बार आम आदमी पार्टी को मौका देगी।

9. सांसद मनोज तिवारी ने चर्चा को लेकर कहा है। आपको नहीं लगता मामले में चुनौती होनी चाहिए?
कानून क्या आम आदमी पार्टी के लिए बना है? चर्चा किसान से होनी चाहिए। इसीलिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जो केंद्र सरकार में सबसे विद्वान मंत्री हो या किसानों का प्रतिनिधि हो, आ जाए, बहस हो जाए और फिर दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। एक तरफ सरकार कह रही है कि तीन कानून आ जाएंगे तो अच्छा हो जाएगा। किसान कह रहा है कि हम बर्बाद हो जांएगे, सरकार कह रही है कि तुम अपना हित नहीं समझते। सरकार कह रही है कि हम जबरदस्ती देंगे।

10. ये वास्तव में काले कानून हैं या फिर सिर्फ आप लोग कह रहे हैं?
आप भाजपा नेताओं के भाषण सुनो, कहते हैं कि जमीन नहीं छीनी जाएगी, वह तो किसानों की है। फसल मंडी के बाहर बेच पाएंगे, वो तो पहले से ही है। फायदा सिर्फ 4 उद्योगपतियों को है, जो कि मोदी के दोस्त हैं। सरकार कानून में एक वाक्य लिख दे कि फसल एम.एस.पी. से कम पर बेचेंगे तो कानूनन अपराध होगा और जेल होगी। सरकार इतना नहीं कर पा रही है।

11. एम.एस.पी. की इतनी ङ्क्षचता है तो आपने दिल्ली के किसानों का भला क्यों नहीं कर दिया?
एम.एस.पी. पर खरीद केंद्र सरकार करती है। केंद्र सरकार के मंसूबे हैं कि एम.एस.पी. छोड़ो, किसान को बंधुआ मजदूर बनाओ, मंडियां खत्म कर दो, किसान व्यवस्था और उसका मुनाफा चार उद्योगपतियों को दे दो। इसमें सब पार्टियां शामिल हैं। बात करें बादलों की तो वे भाजपा के साथ कानून लाने और पास करने में साथ थे।  कैप्टन साहब तो उस कमेटी में थे, उन्होंने तब तो कोई असहमति नहीं दर्ज करवाई। अब किसान मजबूर होकर अपनी लड़ाई लड़ रहा है।

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