Monday, Dec 09, 2019
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केजरीवाल को बिजली मुद्दे पर शिकायत का आधार नहीं बता सकीं शीला दीक्षित

  • Updated on 6/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में बिजली के दामों को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने के दौरान अपनी शिकायत का आधार नहीं बता सकीं।  

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पूर्व में हुई एक घटना का हवाला देते हुए भारद्वाज ने कहा कि जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित, दिल्ली की मुख्यमंत्री थी, तब अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली के दामों को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था। दिल्ली की जनता बिजली के दामों को लेकर बेहद परेशान थी। लगभग 10 लाख लोगों ने बिजली के दामों के खिलाफ पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

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जब यह 10 लाख पत्र लेकर केजरीवाल और उनके साथी, उस समय की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर उनसे मिलने पहुंचे, तो उनके एक सहयोगी ने यह कहकर, कि मुख्यमंत्री सो रही हैं, केजरीवाल और उनके साथियों को शीला जी से मिलने का समय तक नहीं दिया था। लेकिन आम आदमी पार्टी जनता की पार्टी है और जनता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी व्यक्ति से, किसी भी पार्टी से बातचीत करने के लिए तत्पर रहती है।

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उन्होंने बताया मुलाकात के दौरान जब मुख्यमंत्री ने शीला दीक्षित जी से पूछा कि आप बिजली के दामों को लेकर यह जो आंकड़े लेकर आए हैं, इनका आधार क्या है? तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। शीला दीक्षित ने पलटकर कांग्रेस के दूसरे नेता हारून यूसुफ जी की तरफ देखा, हारून के पास भी इसका कोई जवाब नहीं था। उन्होंने भी पलटकर कांग्रेस के एक और नेता देवेंद्र यादव की ओर देखा और देवेंद्र यादव जी ने लिलोठिया जी की तरफ देखा। 

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यानि कांग्रेस की ओर से शीला दीक्षित सहित, जो लोग बिजली के मुद्दे पर शिकायत लेकर आए थे, उनमें से किसी के पास भी इस बात का जवाब नहीं था कि यह आंकड़े जो वह लेकर आए हैं उसका आधार क्या है। प्रेस वार्ता में मौजूद कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन ने कुछ आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि कांग्रेस के जो भी आरोप है सब निराधार है। 

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय की तुलना में आज दिल्ली में बिजली के दाम बहुत कम है। 2010 में जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब 1 किलो वाट के मीटर पर 50 यूनिट का बिल ₹153 था। वही बिल 2013 आते-आते ₹264 तक पहुंच गया। अर्थात शीला दीक्षित जी की सरकार में 3 साल के अंदर 73% बिजली के दाम बढ़ाए गए। 

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आज दिल्ली में 50 यूनिट के लिए मात्र ₹128 के बिल का भुगतान करना पड़ता है, जोकि शीला सरकार के समय से लगभग आधा है। इसी प्रकार 100 यूनिट तक के लिए शीला दीक्षित जी की सरकार के समय ₹485 बिल भुगतान करना पड़ता था। आज वही बिल मात्र ₹211 के लगभग उपभोक्ताओं को भुगतान करना पड़ता है।
 

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