Wednesday, Jan 26, 2022
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अभिषेक मनु सिंघवी का CBI से सवाल- नारदा केस दशकों पुराना, अब गिरफ्तारी की जरूरत क्यों पड़ी?

  • Updated on 5/17/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। नारद स्टिंग मामले में जांच एजेंसी द्वारा ममता बनर्जी सरकार के 2 बड़े मंत्रियों समेत टीएमसी के 3 नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राज्य में माहौल गरमा गया है। बड़ी संख्या में टीएमसी समर्थक सीबीआई दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीबीआई की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पीकर के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नारदा केस दशकों पुराना है और अब एक दम से गिरफ्तारी की क्यों जरूरत पड़ गई।

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सिंघवी का केंद्र और CBI पर हमला
वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, 'पश्चिम बंगाल में गिरफ्तारियों के पीछे केंद्र सरकार और सीबीआई के गलत इरादे दिखते हैं।' उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी की जरूरत भी होनी चाहिए। गिरफ्तार करने की शक्ति होने का मतलब यह नहीं है कि आप गिरफ्तार करने के लिए बाध्य ही हैं। सिंघवी ने कहा कि नारदा दशक पुराना मामला है, टेप भी 2016 के हैं। ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी आ चुका है, फिर अभी दो गिरफ्तारियां करने के पीछे क्या जरूरत थी?

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CBI कार्रवाई को बताया चुनाव में हार की वजह
उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, 'इसपर गंभीर संदेह है कि राज्यपाल, जिनका पक्षपातपूर्ण रवैया स्पष्ट है, उनके पास जांच को मंजूरी देने की शक्ति है, वो भी बस इसलिए क्योंकि उन्होंने 2011 में मंत्रियों को शपथ दिलाई थी? और फिर 2016 में टेप आने के पांच साल बाद क्यों सैंक्शन करना और फिर अचानक से 2021 में गिरफ्तारी क्यों? चुनावों में हारने की वजह से? बदला लेने के लिए? चुनाव का नतीजा बदलने के लिए?' 

अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने अंतिम ट्वीट में कहा, 'विधायकों के खिलाफ केस स्पीकर की अनुमति के बिना नहीं की जा सकती। इसलिए ये न्यायिकता की कमी, बदले के लिए हुई गिरफ्तारी, गिरफ्तारी की टाइमिंग, इस सबसे गिरफ्तारी के पीछे घटिया और खतरनाक बदले की भावना दिखती है।'

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ममता के दो मंत्रियों समेत 4 TMC नेता हुए गिरफ्तार
गौरतलब है कि सीबीआई ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता फरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा के साथ पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग मामले में कोलकाता में गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने इस बारे में बताया कि नारद स्टिंग मामले में कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर धन लिए जाने के मामले का खुलासा हुआ था। हकीम, मुखर्जी, मित्रा और चटर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी लेने के लिए सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का रुख किया था। वर्ष 2014 में कथित अपराध के समय ये सभी मंत्री थे।

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हाकिम ने किया ये दावा
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय बलों के साथ सीबीआई की एक टीम सोमवार सुबह हाकिम के चेतला आवास पर पहुंची और उन्हें जांच एजेंसी के कार्यालय ले गयी। राज्य के परिवहन और आवास मंत्री हाकिम ने दावा किया, 'सीबीआई ने नारद मामले में मुझे गिरफ्तार किया है। हम अदालत में इस मामले को ले जाएंगे।' राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हाल में हाकिम, मित्रा और मुखर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे दी थी।

हकीम, मुखर्जी और मित्रा तीनों हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए हैं। वहीं, भाजपा से जुड़ने के लिए चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी थी और दोनों खेमे से उनका टकराव चल रहा है। नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए। यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के पहले सार्वजनिक हुआ था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था। 

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