Saturday, Jan 28, 2023
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न्याय के अधिकार को साकार करने के लिए पर्याप्त न्यायिक अवसंरचना अहम : प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़

  • Updated on 12/7/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी से परे भी भारत बसता है और जिला स्तरीय न्यायपालिका पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय के अधिकार को साकार करने का एक महत्वपूर्ण घटक यह सुनिश्चित करना है कि पर्याप्त न्यायिक अवसंरचना हो जो जिला स्तरीय न्यायपालिका से शुरू होगी। दिल्ली उच्च न्यायालय के ‘एस' ब्लॉक भवन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि भारत राजधानी से परे भी बसता है।'' 

उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में , ‘‘हमारी इमारतों का वास्तुशिल्प न्याय पाने वालों के मन में डर पैदा करने की भावना से बनाया गया था और न्याय देने वाले और न्याय जिनके लिए किया जाता है, उनके बीच विभाजन के लिए ऐसा किया गया।'' प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्याय को लेकर समझ अब काफी बदल गयी है और अब इस बात के प्रयास किये जा रहे हैं कि लोग हम तक पहुंचें, उसके बजाय लोगों तक पहुंचा जाए। अत्याधुनिक भवन का उद्घाटन करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘‘यह इमारत आधुनिक को लोकतांत्रिक से जोड़ती है और दिल्ली उच्च न्यायालय अपने आप में न्यायिक व्यवस्था के गलियारों में हवा का झोंका है।'' 

केजरीवाल का केंद्र और न्यायपालिका के सामने खास प्रस्ताव 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र और न्यायपालिका के सामने एक खास प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा है कि आम आदमी के लिए न्याय में देरी ना हो इसके लिए दिल्ली को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना चाहिए। इसके तहत 6 महीने के भीतर न्याय हो जाना चाहिए। इसके लिए दिल्ली सरकार फंड की कोई कमी नहीं होने देगी। केजरीवाल ने कहा कि लिमिटेड फंड के बावजूद हम कोशिश करेंगे कि न्यायपालिका के लिए हमसे कोई कमी न हो, इस देश के आम आदमी को बहुत वक्त लग जाता है जस्टिस पाने में। प्रस्ताव रखना चाहता हूं कि दिल्ली में हर Case 6 महीने के अंदर सुलझे—इस पर बैठकर काम करते हैं, मैं और मेरी सरकार साथ है।

देश में लंबित मामलों की संख्या कुछ महीने में पांच करोड़ तक पहुंच सकती है: रीजीजू 
कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने मंगलवार को कहा कि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कुछ महीनों में पांच करोड़ के आंकड़े को छू सकती है। लंबित मामलों के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में कमी आने की संभावना है, लेकिन "असली चुनौती" निचली अदालतों में है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की उपस्थिति में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मंत्री ने कहा कि लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े की ओर बढ़ रही है। 

उन्होंने निचली अदालतों में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे का मुद्दा उठाया। कुछ महीने पहले तक लंबित मामलों की संख्या 4.83 करोड़ आंकी गई थी। उन्होंने कहा, "जब हम संख्याएं लेते हैं तो मैं अड़चन के बारे में विश्लेषण करने की कोशिश करता हूं। यह पांच करोड़ मामले लंबित होने की ओर बढ़ रहा है। यह बड़ी चिंता का विषय है।" रीजीजू ने कहा कि उन्हें संसद और अन्य जगहों पर लंबित मामलों पर जवाब देना है। 

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