Wednesday, Jun 19, 2019

लोकसभा चुनावः 30 साल बाद फिर साथ आएगा चरण सिंह और देवीलाल का परिवार

  • Updated on 4/16/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। चौधरी चरण सिंह (Ch. Charan Singh) और चौधरी देवीलाल (Ch. Devilal) के बीच पिछली 3 पीढ़ी से चलती आ रही राजनीतिक लड़ाई आखिरकार खत्म होने की कगार पर आ पहुंची है। 2019 के लोकसभा चुनावों में देवीलाल के परिवार से हिसार (Hisar) सांसद दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) और चौधरी चरण सिंह के परिवार से जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) एक साथ मिलकर रालोद नेता नरेंद्र सिंह के लिए रोड शो करते नजर आएंगे।

सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन-चार सालों में जयंत और दुष्यंत के बीच काफी नजदीकियां आई हैं। जयंत और दुष्यंत मिलकर, इन सियासी घरानों को फिर से एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहें हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश में पहली बार दोनों नेता एक ही मंच पर दिखेंगे और यही नजारा हरियाणा में भी देखने को मिलेगा। दुष्यंत और जयंत ने मथुरा के 15 से अधिक गांवों में रोड शो करने का कार्यक्रम तय किया है। यहां जयंत जेजेपी (JJP) प्रत्याशियों के लिए वोट मांगते नजर आएंगे।

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बता दें कि दुष्यंत चौटाला जननायक जनता दल (Jannayak Janta Dal) के अध्यक्ष हैं। तो वहीं जयंत चौधरी रालोद (RLD) से नेता हैं। दोनों परिवारों में पिछले 30 सालों पहले खटास आ गई थी। जिसको मिटाने का काम जयंत और दुष्यंत मिलकर कर रहे हैं।

इस वजह से रिश्तों में आ गई थी खटास

पिछले 30 साल पहले चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल के परिवारों के बीच अच्छे संबंध थे। सत्तर के दशक में दोनों नेताओं ने मिलकर मोरारजी देसाई (Morarji Desai) की सरकार गिराई थी। लेकिन जैसे ही चौधरी चरण सिंह राजनीति में उपर पहुंचने लगे उन्होंने देवीलाल के परिवार की अनदेखी करनी शुरू कर दी। उसके बाद से इन दोनों परिवारों के रिश्तों में कड़वाहट फैलनी शुरु हो गई।

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बात यहां तक पहुंची कि अस्सी के दशक में देवीलाल के खिलाफ चौधरी चरण सिंह ने अपनी पार्टी का प्रत्याशी तक खड़ा कर दिया था। हालांकि देवीलाल के सामने चरण सिंह के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। हालांकि तीसरी पीढ़ी में इन दोनों सियासी घरानों के रिश्ते सुधरने के कयास लगाए जा रहें हैं।

नब्बे के दशक में देवीलाल ने चौधरी चरण सिंह से बदला लेने के लिए उनके बेटे अजीत सिंह से मुख्यमंत्री की गद्दी छीन ली थी और उनकी जगह चौधरी देवीलाल ने कुश्ती के माहिर मुलायम सिंह (Mulayam Singh) को मुख्यमंत्री पद दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों के बीच विवाद इस कदर तक बढ़ गया था कि दोनों ने बातचीत तक करना बंद कर दिया था।

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इन दोनों परिवारों के बीच अब रिश्ते सुधारने का काम दुष्यंत और जयंत मिलकर कर रहे हैं। बता दें कि दुष्यंत इस बार बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं जयंत मथुरा से हेमा मालिनी (Hema Malini) के खिलाफ खड़े हैं। अब देखना ये होगा कि दुष्यंत और जयंत कैसे इस 30 साल पुरानी दुश्मनी को मिटा पाते हैं।

 

 

 

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