Friday, Feb 26, 2021
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आखिर कहां फंसा पेंच नीतीश कैबिनेट के विस्तार में, क्या है BJP की मंशा?

  • Updated on 1/19/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। बिहार में नीतीश कैबिनेट के विस्तार पर सस्पेंस जारी है। राज्य में एनडीए सरकार के गठन के दो महीने बीत जाने के बाद भी सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) असहज और असहाय नजर आते है। तो इसकी वजह एकमात्र हालिया विधानसभा चुनाव में जदयू को पछाड़कर बीजेपी के 74 सीटों पर जीत हासिल से है। जहां से भले ही सत्ता का बागडोर नीतीश के हाथ में हो,लेकिन उसे बीजेपी के चाबुक से बचना भी एक चुनौती है। 

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नीतीश कैबिनेट में बीजेपी चाहता दबदबा

बीजेपी राज्य में बदले हुए राजनीतिक समीकरण का फायदा उठाना चाहती है। जिसमें नीतीश कैबिनेट में पूरा दबदबा कायम रखना चाहता है। जो नीतीश के गले की फांस बनी हुई है। दरअसल बीजेपी ने नीतीश को संदेश भेजवाया है कि कैबिनेट विस्तार में उसी फार्मूला को लागू किया जाए जो पिछले 15 सालों से एनडीए पर लागू करती रही है। अगर नीतीश के पिछले कार्यकाल की बात की जाए तो जदयू कोटे से 22 मंत्री तो बीजेपी कोटे से 13 मंत्री थे। यहां ध्यान देने वाली बात है कि पिछले एनडीए कार्यकाल में जदयू के 71 विधायक थे तो बीजेपी के 54 विधायक थे।

Nitish Kumar

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 पिछले कार्यकाल की तरह हो सत्ता का बंटवारा 

लेकिन 2020 आते-आते सबकुछ बदल गया। बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी 74,जदयू 43 हम 4,वीआईपी 4-इस तरह एनडीए के 125 विधायक है। जिससे  बिहार एनडीए में बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में आने के लिये बेताब है। जो नीतीश को नागवार गुजरता है। हालांकि चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी ने गठबंधन धर्म निभाया। पार्टी को सबसे ज्यादा विधानसभा में सीट आने के वाबजूद नीतीश कुमार को सत्ता का मुखिया बनाया। लेकिन बदले में विधानसभा अध्यक्ष पद और दो डिप्टी सीएम बनाने में सफल रहे। फिर यहीं से नीतीश पहली बार बीजेपी के दवाब में आती नजर आई।

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अगले 5 साल तक चलाने होगें सरकार

लेकिन अब आगे क्या- यह बहुत बड़ा सवाल है। कारण अभी तो 5 साल एनडीए को सरकार चलाना है। लेकिन गठबंधन को अभी बहुत अग्निपरीक्षा से गुजरना है। विपक्षी दल लगातार नीतीश को निशाने पर रखे हुए है। कहीं एक चूक करें और बस सरकार का पतन हो। बिहार में फिलहाल कानून राज पर भी विपक्ष हमलावर है। तो दूसरी तरफ बीजेपी कैबिनेट विस्तार से ज्यादा शाहनवाज को पहेली बनाकर दिल्ली से पटना भेज दिया है। जिसको समझने की कोशिश में नीतीश कुमार और जदयू भी है। अगर शाहनवाज की नीतीश कैबिनेट में इंट्री होती है तो क्या गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण पद बीजेपी मांग सकती है, जो अभी नीतीश कुमार के पास है। सवाल उठता है कि पहले ही विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान के बहाने जदयू को घायल कर चुकी बीजेपी अब शाहनवाज का किस तरह से मगध की धरती पर इस्तेमाल करेगी-यह देखना महत्वपूर्ण होगा।  

      

 

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