Wednesday, Feb 19, 2020
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आखिर कौन है हेमंत सोरेन जिसने किया झारखंड में सबसे बड़ा उलटफेर

  • Updated on 12/23/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election) की 81 सीटों के रुझानों में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन को बहुमत मिल गया है। जो बीजेपी के लिये बहुत बड़ा झटका है। जेएमएम गठबंधन 48 सीटों पर आगे चल रहा हैं। ऐसे में जेएमएम अध्यक्ष हेमंत सोरेन (Hemant Soren) का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है।

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जानें जेएमएम का इतिहास

जेएमएम में शिबू सोरेन के उत्तराधिकारी और प्रदेश में कांग्रेस (Congress) के साथ गठबंधन सरकार का नेतृत्व पहले भी हेमंत सोरेन कर चुके है। पूर्व मुख्यमंत्री और जेएमएम  अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर सबकी नजरें टिकी हैं। जेएमएम अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने 2013 में पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भी सरकार बनाने में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने समर्थन किया था।

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हेमंत ने किया बड़ा उलटफैर

राज्य में संपन्न हुए हाल के विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने में हेमंत सोरेन कामयाब हो चुके है। हालांकि यह बात सच है कि विपक्ष में रहते हुए भी हेमंत सोरेन राज्य के आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। तत्कालीन सरकार ने छोटा नागपुर (Chota Nagpur) टीनेंसी एक्ट और संथाल परगना टीनेंसी एक्ट को बदलने की कोशिश की थी। इसमें आदिवासी भूमि को गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल करने का प्रावधान था। इसका राज्य में काफी विरोध हुआ था। और हेमंत सोरेन ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। 

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आदिवासी समाज से तालुक्कात रखते है हेमंत

आपको बता दे की हेमंत सोरेन राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिबू सोरेन (Shibu Soren) राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा(JMM) के सुप्रीमो रह चुके है। हेमंत सोरेन सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में शुमार रहे हैं। हेमंत सोरेन अपने पिता की तरह राज्य में आदिवासी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं। आदिवासियों के हक को लेकर हेमंत सोरेन ने झारखंड के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पर कई आरोप लगाया। जिसका फायदा विधानसभा चुनाव में उन्हें मिला।

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 झारखंड में भी शराबबंदी चाहते हैं हेमंत सोरेन  
हेमंत सोरेन पीडीएस(PDS) में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के मुखय आलोचक भी रह चुके हैं। इसके अलावा हेमंत सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन के साथ एससी-एसटी एक्ट (SC ST Act ) में बदलाव के विरोध किया था और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की थी। यही नहीं वे बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी शराबबंदी की वकालत लंबे समय से करते आए हैं। 

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दो विधानसभा क्षेत्र से लड़े थे हेमंत

हेमंत सोरेन झारखंड के दुमका और बरहेट सीट से अपनी किस्मत आजमाया है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में एक सीट पर हेमंत को हार का  सामना करना पड़ा था। लेकिन बरहेट सीट पर मतदाताओं ने जीत दिला कर विधानसभा में भेजा था ।इस बार भी जेएमएम अध्यक्ष हेमंत सोरेन दुमका और बरहेट से चुनाव लड़ा है। हेमंत सोरेन दोनों विधानसभा सीट पर जीत हासिल किये है।  

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