Sunday, Oct 17, 2021
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आखिर क्यों BJP ने चुनावी वर्ष में बदल दिये CM फेस, क्या है मजबूरी ?

  • Updated on 9/11/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी आज की तारिख में सबसे मजबूत दल है। लेकिन लोकतंत्र में सत्ता जाते भी देर नहीं लगती। हालांकि सत्ता तक पहुंचने में दशकों बीत जाते या कई पीढ़ियों के खपने के बाद ही शुभ मुहुर्त आते है। जैसा कि बीजेपी के साथ हुआ है। लेकिन जब सत्ता फिसलती है तो ऐसे कि जैसे पता भी नहीं चल पाता है। इसी आशंका के मद्देनजर बीजेपी एक के बाद एक करके राज्य में अपने सीएम फेस बदलती जा रही है। ताकि आगामी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता जनार्दन की नाराजगी को दूर किया जा सकें।

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खैर जनता कितने नए चेहरों पर भरोसा करती है यह तो चुनाव परिणाम से ही साबित होंगे। लेकिन बीजेपी उत्तर से लेकर दक्षिण फिर पश्चिम तक यानी कर्नाटक से लेकर उत्तराखंड और गुजरात तक के सीएम को बदलना ही उचित समझा। हालांकि जरुर बीच में उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी बदलने की अटकलें तेज हुई थी,लेकिन ऐसा हो नहीं सका। 

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लेकिन पीएम और गृह मंत्री के गृह प्रदेश में जब विजय रुपाणी की कुर्सी चली गई तो साफ हो गया कि कहीं न कहीं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व भी स्वीकार कर चुका है कि मौजूदा चेहरे पर संबंधित राज्य में चुनावी फतह जीतना मुश्किल ही है। वहीं उत्तराखंड में तो हद तब हो गई जब बीते छह महीने में तीन सीएम बदल दिये गए। वैसे इस पर्वतीय राज्य में सीएम की कुर्सी भी पहाड़ी चट्टान की तरह जल्द ही खिसक जाते है। फिर सरकार में बीजेपी हो या कांग्रेस-इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

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अब सवाल उठता है कि क्या मौजूदा चुनौती बीजेपी के लिये किसी गहरे संकट की और इशारा तो नहीं कर रही। इसलिये पार्टी को पॉलिटिकल सर्जरी की आवश्यकता पड़ रही है। वास्तव में देखा जाए तो कोरोना काल और देश की गिरती आर्थिक सेहत से मोदी सरकार परेशान है। पार्टी को लगने लगा कि अगले साल देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश में फिर से सत्ता हासिल करना सबसे ज्यादा जरुरी है। यह हमेशा से देखा गया कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ होते हुए ही गुजरता है। इसलिये साल 2024 के लिये बीजेपी ज्यादा सजग नजर आ रही है। ताकि विरोधी दलों को ज्यादा मौका नहीं मिल सकें। वहीं बीजेपी की चिंता इसलिये बढ़ गई है कि पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत झोंकने के बाद भी ममता सरकार को जमींदोज नहीं कर सकी। ऐसे में घायल ममता से भी पार्टी सजग हो गई है। जबकि विपक्षी एकता मौजूदा समय में जरुरत से ज्यादा नजर आ रही है। जो बीजेपी के लिये सही नहीं है।    

 

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