Monday, Sep 27, 2021
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आखिर क्यों केरल में BJP हिंदुओं से ज्यादा मुसलमानों पर करती है भरोसा? जानें विस्तार सें

  • Updated on 3/6/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। केरल (Kerala) एकमात्र राज्य हैं जहां दक्षिणपंथी पार्टी बीजेपी को आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं से ढ़ेर सारी उम्मीदें है। तो इसके पीछे के वजहों को जानना जरुरी है कि जब देश भर में मुसलमानों का झुकाव और विश्वास भगवा दल पर उतना नहीं बन पाया जितना विरोधी दलों पर हैं। वहीं केरल में आखिर पार्टी 360 डिग्री घूमते हुए राजनीतिक गियर ही कैसे बदल डाली-यह सवाल लोगों के मन-मस्तिष्क में कौतुहलता पैदा करती है।

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बीजेपी ने दक्षिण में बदली रणनीति ताकि...

मालूम हो कि राज्य में लगभग 45 फीसदी वोटर्स मुस्लिम और ईसाई समुदाय से है। दरअसल बीजेपी का झुकाव और दांव मुस्लिमों,ईसाईयों पर रातोंरात नहीं हुआ, यह तो साफ है। बल्कि पार्टी के थिंक टैंक को महसूस होने लगा कि अगर देश भर में लेफ्ट पार्टी के आखिरी किले 'लाल किले' को हटाना है तो उसके मजबूत वोटबैंक में बिना सैंधमारी के सफलता हासिल नहीं हो सकती। इसलिये पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। जिसका स्पष्ट संकेत राज्य में पिछले साल हुए स्थानीय निकाय चुनाव में देखने को मिला जब तकरीबन 600 से ज्यादा उम्मीदवार इन्हीं समुदाय से उतार दिये।

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विधानसभा में सीट बढ़ाने की हैं चिंता 

बीजेपी के इस मास्टस्ट्रोक से सत्ताधारी LDF और मुख्य विपक्षी दल UDF भी आश्चर्य में पड़ गई। हालांकि बीजेपी का यह हृदय परिवर्तन अचानक से नहीं हुआ। बल्कि वर्षों से RSS के पैठ बनाने के बाद भी केरल विधानसभा में भगवा झंडा फहराने में बीजेपी को कोई खास कामयाबी नहीं मिली। तो उसके बाद केरल में पार्टी को मजबूरन रणनीति बदलनी पड़ी।

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अब्दुलकुट्टी ने पार्टी के लिये की मेहनत

दरअसल केरल में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एपी अब्दुलकुट्टी ने अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मेहनत करके उम्मीद ही जगा दी। उन्होंने एक रणनीति के तहत भगवा दल से लोकल बॉडी चुनाव में 112 मुस्लिमों को तो 500 ईसाई को चुनावी मैदान में उतारा। माना जाता है कि उन्होंने यह खास रणनीति प्रदेश के साधन संपन्न मुसलमानों के भीतर राजनीतिक महात्वाकांक्षा जगाकर उन्हें बीजेपी जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिये प्रेरित किया। यहीं नहीं बीजेपी ने मुस्लिम लीग के क्षेत्र में भी मुस्लिम चेहरा को देकर एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। 

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मुस्लिम लीग से गठबंधन से किया किनारा 

हालांकि बीजेपी को तब बगल झांकने के लिये मजबूर होना पड़ा जब केरल बीजेपी नेता शोभा सुरेंद्रन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि उनकी पार्टी मुस्लिम लीग से गठबंधन करने के लिये तैयार है। लेकिन बाद में पार्टी के कद्दावर नेता टॉम वडक्कम ने इसे निजी राय बताकर पल्ला झाड़ लिया। वैसे बीजेपी ने जरुर जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाकर देश भर के मुस्लिम वर्गों को खास संदेश दिया। इसके वाबजूद पार्टी को कोई खास सफलता नहीं मिली। लेकिन कम के कम केरल में मुस्लिम लीग से बीजेपी गठबंधन करके गलत संदेश भी नहीं देना चाहती है। इसलिये पार्टी ने शोभा सुरेंद्रन के वक्तव्य का खंडन करने में देरी भी नहीं की। कारण मुस्लिम लीग अपनी कट्टरवादी छवि के लिये बदनाम है। कभी योगी आदित्यनाथ ने इस संगठन को वायरस कहकर आलोचना की थी।   

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आगामी 6 अप्रैल को होने हैं मतदान

अब देखना दिलचस्प होगा कि केरल विधानसभा के 140 सीट के लिये मतदान  6 अप्रैल को होने है। तो टिकट बंटवारें में बीजेपी क्या लोकल बॉडी चुनाव की तरह ही अल्पसंख्यक समुदायों पर विश्वास करेगी या नहीं? हालांकि यह साफ है कि केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। ऐसे में पिनाराई विजयन की कुर्सी को कांग्रेस से खतरा है या बीजेपी से-यह तो 2 मई को पता चल पाएगा।  

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