Monday, Mar 30, 2020
after all why did not open the path of shaheen bagh

आखिर क्यों नहीं खुला शाहीन बाग का रास्ता, क्यों असफल हुए वार्ताकार?

  • Updated on 2/22/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। शाहीन बाग (Shaheen Bagh),शाहीन बाग, शाहीन बाग..... यह बाग तो इतना हिट हो रहा है कि बागों में बहार है गाना को भी पीछे छोड़ दिया है। भले ही इस गाने पर आप झूमने के लिये मजबूर हो जाए लेकिन शाहीन बाग का नाम सुनकर आप विस्मय में जरुर पड़ जाते होंगे। बहुत महत्वपूर्ण है इसलिये की ठंड की ठिठुरन में जब देश भर में CAA को लेकर हिंसक आंदोलन हो रहा था तो तभी चुपके से खुले आकाश (बाद में लगा टेंट) के नीचे बैठी महिलाओं ने अचानक देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। जितनी मुंह उतनी बातें आज कल हर जगह शाहीन बाग को लेकर हो रही है।

A road goes to shaheen bagh

शाहीन बाग: तीन दिनों की मुलाकात के बाद भी वार्ताकार नहीं खोल पाए रास्ता

शाहीन बाग को लेकर कई सवाल है 
जब मेरे मन में भी शाहीन बाग को लेकर अनेक विचार कौंधने लगा तो जाना उचित समझा। वहां जाने की उत्सुकता इसलिये महसूस हुई कि जिस शाहीन बाग को लेकर इतना शोर मचाया जा रहा है आखिर वो है क्या- प्रदर्शन पर बैठे लोगों को परखना बहुत जरुरी लगने लगा। कारण आप सीधे-सीधे किसी सामान्य नागरिक को भी देशद्रोही तक कह देते हैं तो ऐसे लोगों से मिलना जरुरी हो जाता है। 

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दिल्ली चुनाव में उठा यह मुद्दा
हालांकि यह साफ था दिल्ली विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दलों के नेताओं ने शाहीन बाग को लेकर विवादित बयान देने में देरी नहीं लगाई। खासकरके बीजेपी नेताओं ने विवादित बयान भी दिया तो दिल्ली की जनता ने Hate Speech को नकारना ही बेहतर समझा। तो वहीं कांग्रेस और आप पार्टी ने इस प्रदर्शन को सही ठहराया। 

Shaheen bagh protestors

मध्यस्थता पर बोले प्रदर्शनकारी- शाहीन बाग से देशभर के प्रदर्शन खत्म करने की साजिश

प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही नहीं कहा जा सकता
ऐसा नहीं हो सकता कि कोई बोले अरे वहां तो देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। शाहीन बाग पहुंचकर मैंने वहां बैठी महिलाओं से बातचीत की तो उनका व्यवहार ऐसा ही लगा जैसे आप अपने घर के मां और बहनों से मिलते हैं। बड़े अदब से पेश आने पर मैं तो हैरान ही हो गया। मुझे रत्ती भर भी नहीं महसूस हुआ कि यहां बैठे लोग किसी बड़े साजिश के हिस्सा के तहत रास्ता रोके हुए हैं। हालांकि मेरे पहुंचने से 1 दिन पहले ही मशहूर टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ बदतमीजी से पेश आने की खबर आई थी।  

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वार्ताकर को हुई निराशा
लेकिन एक सवाल जो सबको सोचने के लिये विवश कर देती है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने तरफ से वार्ताकर को बंद रास्ता को खोलने के लिये नियुक्त किया तो इसके बाद भी बातचीत सफल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिर क्या चाहते है शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी जिस कारण केंद्र सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट को भी मुंह की खानी पड़ी है? संसद से पास कानून को क्या सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों के जिद के कारण वापस लेना चाहिये या नहीं? तमाम ऐसे सवाल हैं जिसके जवाब की तलाश में मीडिया जगत से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग और केंद्र सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट तक दुविधा में नजर आते है।

Shaheen bagh where map of india seen

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जब पीएम मोदी ने शाहीन बाग को बताया प्रयोग तो...
जब तक दिल्ली विधानसभा चुनाव की गूंज थी तब तक पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी शाहीन बाग को एक अनूठा प्रयोग बताया तो वहीं करंट जैसी बातें सुनने को मिली। उधर अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि 11 फरवरी के बाद रास्ता खुल जाएगा। लेकिन अब चुनाव परिणाम भी आए 10 दिन से ऊपर हो चुका है तो फिर शाहीन बाग क्यों नहीं खत्म हो रहा है?

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घरेलू महिलाएं कर रही है शाहीन बाग का प्रदर्शन
इसका मतलब है कि पीएम मोदी ने जो प्रयोग की बात कही थी वो सच है या CAA को लेकर प्रदर्शन पर बैठी महिलाओं के मंशा पर सवाल उठाना गलत है। इसके अंतर को समझना जरुरी है। इसलिये कि शाहीन बाग में बैठे लोग तो निश्चित रुप से घरेलू महिलाएं ही है जिसे CAA को लेकर उतनी समझ ही नहीं है। लेकिन इसके वाबजूद वो भारी संख्या में बैठी हैं तो इसके दो ही कारण हो सकते है- एक तो उनके मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डर हो गया है कि यदि CAA, NRC लागू हुआ तो उन्हें परिवार समेत इस मुल्क से बाहर कर दिया जाएगा। जो कि सरासर झूठी अफवाहें और कोरी बातें है। 

Protest of people against CAA

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सूचना क्रांति के युग में भी अफवाह है
ऐसे में ताजुब्ब होता है कि इस सूचना क्रांति के युग में भी जितनी गति से सूचना अबाध गति से पहुंचती है उससे तीव्र गति से अफवाह कितनी तेजी से फैलती है। लेकिन हमारा समाज और देश इस अफवाहों को रोकने में पूरी की पूरी असहाय नजर आता है। यहां तक कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार सच पर भारी अफवाहों को अपने-अपने चश्मे से समझने और समझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। ताकि इसका Political mileage लिया जा सके।  

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राजनीतिक दलों ने पैदा किया विवाद
जब केंद्र हो या राज्य सरकार इसी Political mileage की लालच छोड़ दें तो पता नहीं यह शाहीन बाग प्रदर्शन कब का खत्म हो चुका होता। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पक्ष और विपक्ष शाहीन बाग प्रदर्शन पर तब तक ढोल पीटता रहा जब तक उन्हें इसका फायदा मिलता नहीं दिखा। खासकरके दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी इसे विपक्षी पार्टी की साजिश करार दिया तो आप पार्टी ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी- शाह चाहें तो 1 घंटे में रास्ता खुल सकता है।  

Supreme court and shaheen bagh protestors

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CAA से किसी को खतरा नहीं तो...
किसके दावे कितने सही है या गलत कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लेकिन अब जबकि चुनाव का शोर भी खत्म हो चुका है तो आश्चर्य होता है कि सुप्रीम कोर्ट के नियुक्त वार्ताकर के प्रयास को धक्का पहुंचने पर शाहीन बाग की गंभीरता को समझने की जरुरत है। जब यह स्पष्ट है कि CAA से किसी भारतीय के नागरिकता पर खतरा नहीं है और NRC पर मोदी-शाह ने अपनी सफाई पेश कर दी है तो इन महिलाओं को प्रदर्शन तुरंत रोक देना चाहिये था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो दूसरा कारण कहीं यह तो नहीं कि उन्हें बैठने के लिये कुछ संगठन या राजनीतिक दल मजबूर कर रहे है- ऐसे लोगों का पता लगाना भी मोदी सरकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

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देश भर में शाहीन बाग की तर्ज पर हो रहा प्रदर्शन
देश भर में शाहीन बाग जैसे आंदोलन की धमकी देना क्या सोची-समझी रणनीति के तहत की जा रही है या नहीं- इसके बारे में केंद्र सरकार को गंभीरता से तहकीकात करानी चाहिये। अगर शाहीन बाग या शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन स्वाभाविक तौर पर आम महिलाओं का प्रदर्शन है तो ठीक है लेकिन यदि इसके पीछे किसी गहरी साजिश की बू आती है तो उसका भी समय रहते पर्दाफाश करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

Narendra modi with amit sah in a programme

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रास्ता रोककर नहीं निकल सकता हल
ऐसे भी किसी संगठन या आंदोलनकारियों को यह हक कतई नहीं बनता है कि लाखों लोगों का रास्ता रोककर महीनों तक बैठा जाए। इसे कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है। आप जरा कल्पना कीजीए कि बिहार या देश के किसी हिस्से से बीचों बीच गांवों से हाईवे गुजरती है और किसी मांग को लेकर वहां मुठ्ठी भर लोग महीनों बैठ जाएं तो स्थानीय प्रशासन, जिला और राज्य सरकार की कितनी बड़ी किरकिरी होगी। आप को अगर सरकार के मंशा पर विश्वास नहीं है तो जरुर सांकेतिक प्रदर्शन बिहार का हाईवे हो दिल्ली का शाहीन बाग करें या आप सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते है। जहां से केंद्र सरकार को भी जवाब-तलब किया जाएगा। इसलिये शाहीन बाग का प्रदर्शन खत्म होनी चाहिये ताकि लाखों लोगों को जो असुविधा हो रही है वो नहीं हो।

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महिलाएं दिखाएं सूझबूझ
अगर ऐसा नहीं होता है तो इन महिला प्रदर्शनकारियों को संदेह की नजर से घूरने वाले लोगों की भी कमी नहीं है जो अब तक शांति पूर्वक और बिना विवाद के प्रदर्शन को बदनाम करने में जुट सकते हैं। जिससे इन प्रदर्शनकारियों को सचेत रहना चाहिये। उन्हें भी अपना कंधा इस्तेमाल करने की किसी संगठन को इजाजत नहीं देनी चाहिये। कोई ऐसा रास्ता जरुर निकाले कि शाहीन बाग और सरकार दोनों Win-Win विक्ट्री का Sign देश को दिखा सकें। देश भी इन महिलाओं का अभिनंदन करेगा यदि वे अपना आंदोलन को अब खत्म कर देती है।   
 

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