Monday, May 23, 2022
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बाहुबली के बाद अब असुर शब्द से गरमाई लोनी की राजनीति

  • Updated on 1/20/2022

नई दिल्ली/संजीव शर्मा। नामांकन प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई कि गाजियाबाद की पांचों विधानसभा सीटों में लोनी विस.सीट पर चुनाव सबसे अधिक दिलचस्प होने के आसार दिखाई देने लगे हैं। यहां मतों का गुणा गणित बैठाने के बजाए प्रत्याशियों ने एक दूसरे के खिलाफ जुबानी जंग तेज कर दी है। मतों की जीत से पहले प्रत्याशी जुबानी जंग जीतने का प्रयास कर रहे हैं। इसकी शुरुआत भाजपा प्रत्याशी नंदकिशोर गुर्जर द्वारा की गई। चंद रोज पूर्व उनकी बदजुबानी का एक वीडियो सामने आया। जिसमें उनके द्वारा सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी मदन भैया और बसपा प्रत्याशी हाजी आकिल की ओर इशारा करते हुए उन्हें अली और बाहुबली कहकर हमला किया गया। इसके बाद मदन भैया और आकिल ने भी अपने.अपने लहजे में नंदकिशोर को जवाब दिया। अब भाजपा से बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरी लोनी नगर पालिका की चेयरमैन रंजीता धामा ने भाजपा प्रत्याशी को असुर की संज्ञा देकर लोनी का चुनावी माहौल गरमा दिया। रंजीता का कहना है कि वह नंदकिशोर गुर्जर को हराने के लिए ही पार्टी छोडक़र चुनावी मैदान में कूदी हैं। उनका मकसद असुर का नाश कर विजय श्री प्राप्त करने का है।  


मुस्लिम और गुर्जर बाहुल्य वाली इस लोनी विस. सीट पर भाजपा ने अपने विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर ही दोबारा दांव लगाया है तो सपा-रालोद गठबंधन ने पूर्व विधायक मदन भैया को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, बसपा से हाजी आकिल, आप से सचिन शर्मा और कांग्रेस से यामीन मलिक चुनावी मैदान में हैं। लेकिन वीरवार को लोनी नगर पालिका की चेयरमैन रंजीता धामा ने भाजपा से बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय के तौर पर परचा दाखिल कर चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। दरअसल, रंजीता धामा विधायक नंदकिशोर गुर्जर को टिकट दिए जाने का शुरू से ही विरोध कर रही थीं। विरोध की वजह यह है कि रंजीता मानती हैं कि विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने उनके पति मनोज धामा को गैंगरेप के फर्जी मामले में जेल भिजवाया है। जिसके चलते उन्होंने पहले ही खुलासा कर दिया था कि अगर पार्टी ने नंदकिशोर गुर्जर को दोबारा से टिकट दिया तो वह पार्टी छोडक़र उनके खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। नंदकिशोर का टिकट कटवाने के लिए रंजीता ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के भी चक्कर काटे, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी। जिसके बाद उन्होंने नंदकिशोर का विरोध करने के लिए पार्टी छोडऩे का ही ऐलान कर दिया। 


5.10 लाख मतदाताओं वाली लोनी विस. सीट पर करीब डेढ़ लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा गुर्जर और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में आते हैं। गुर्जर, त्यागी और जाट मतदाता विधायक नंदकिशोर गुर्जर से खपा बताए जाते हैं। बावजूद इसके गुर्जर वोट नंदकिशोर गुर्जर, मदन भैया और रंजीता धामा में बंटने के आसार हैं। वहीं, मुस्लिम वोटों का मदन भैया, आकिल और यामीन के बीच धु्रवीकरण होने का अनुमान लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोटर्स की पहली पसंद सपा-गठबंधन का प्रत्याशी होगा। ऐसे में रंजीता धामा का भाजपा प्रत्याशी के विरोध में निर्दलीय के रूप में चुनाव लडऩा नंदकिशोर गुर्जर के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। लेकिन पार्टी के रणनीतिकार रंजीता धामा को अपनी राह में कोई बड़ा रोड़ा नहीं मानते। यही वजह है कि रंजीता की मंशा को जानने के बावजूद पार्टी के किसी भी पदाधिकारी ने उन्हें समझाने का प्रयास नहीं किया और न ही उनसे पार्टी में बने रहने की गुजारिश की। लोगों का मानना है कि रंजीता जो भी मत हासिल करेंगी उसका नुकसान भाजपा को ही होगा। 


उधर, हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी के परंपरागत वोट को बांधे रखने के लिए नंदकिशोर गुर्जर ने आपत्तिजनक बयान दिया। जिसमें उन्होंने बसपा और गठबंधन प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए कहा कि न अली और न बाहुबली लोनी में एक बार फिर बजरंग बली। इस नारे को निर्वाचन अधिकारी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना और भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ लोनी बॉर्डर थाने में केस दर्ज कराया। बुधवार को गठबंधन प्रत्याशी मदन भैया ने भी नंदकिशोर पर पलटवार करते हुए खुद को बाहुबली बताया और तंज मारा कि ध्यान रहे लोग हमें मदन भैया कहते हैं। अब रंजीता धामा का नंदकिशोर गुर्जर को असुर कहना और असुर का नाश करने के लिए चुनावी मैदान में उतरना कितना सच साबित होगा इसका पता आगामी 10 मार्च को ही चल पाएगा। हां इतना जरुर है कि स्थानीय पुलिस.प्रशासन को लोनी विस.सीट पर खास निगरानी रखनी होगी, वरना प्रत्याशियों की यह जुबानी जंग असल जंग में भी बदल सकती है। 
 

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