Saturday, Jul 31, 2021
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after bjp allies are also increasing the difficulties of congress albsnt

BJP के बाद सहयोगी दल भी बढ़ा रही कांग्रेस की मुश्किलें!

  • Updated on 5/21/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी की निराशाजनक प्रदर्शन रही है। जिससे पार्टी के कार्यकर्ताओं समेत नेताओं तक का मनोबल टूट गया है। वहीं जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां भी पार्टी को सरकार चलाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

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पंजाब और राजस्थान में बढ़ा आंतरिक झगड़ा

मसलन पंजाब और राजस्थान, में कांग्रेस की सरकार के लिये पार्टी की अंदरुनी लड़ाई सबसे बड़ी चुनौती है। तो वहीं महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार चल तो रही है लेकिन एनसीपी कांग्रेस को ही कमजोर करने की फिराक में रहती है।

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गांधी परिवार पर बीजेपी रही हैं हमलावर

दरअसल पहले बीजेपी ने 2014 के बाद से लगातार कांग्रेस को कमजोर करके भगवा दल की पैठ पूरे भारतवर्ष में मजबूत की है। इसमें कोई शक नहीं है। इसके लिये बीजेपी के द्वय शीर्ष नेता मोदी-शाह ने कांग्रेस को कमजोर करने के लिये गांधी परिवार को कमजोर करने की विशेष रणनीति पर काम किया। पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कांग्रेस से ज्यादा गांधी परिवार पर अटैक करके पार्टी की नींव हिलाने की कोशिश की। जिसमें राहुल गांधी पर विशेष फोकस किया गया। इसमें बीजेपी ने कांग्रेस के एक-एक करके मजबूत सिपहसालार को भी अपने पाले में करने में कामयाब हुई।

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कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता थे चाको,लेकिन अब...

तो वहीं  सहयोगी दल एनसीपी भी बीजेपी की ही तरह अपने जनाधार को मजबूत करने के लिये कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश में जुटी रहती है। इसकी एक बानगी देखनी हो तो केरल सटीक उदाहरण है। जहां कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पीसी चाको को एनसीपी ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी है। वहीं चाको भी कांग्रेस के अपने पुराने सहयोगी को एनसीपी में लाने के प्रयास तेज कर दिये है। अगर आने वाले दिनों में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता एनसीपी में शामिल हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। 

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बंगाल में सहयोगी दलों ने किया निराश

मालूम हो कि केरल तक एनसीपी सीमित नहीं रह सकती। एनसीपी प्रमुख कांग्रेस को केरल में टेलर दिखाकर महाराष्ट्र में भी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि महाराष्ट्र में अभी विधानसभा चुनाव दूर है लेकिन शरद पवार जैसे सरीखे चालाक नेता अपने राज्य में भी चुनाव के ऐन वक्त पर देश की सबसे पुरानी पार्टी को तगड़ा झटका दे दें तो आश्चर्य नहीं होगा।

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शिवसेना ने यूपीए चेयर्पर्सन बदलने की मांग की

हालांकि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तब सभी सहयोगी दलों ने आईना दिखा दिया जब ममता बनर्जी को सीधे समर्थन करके अपनी एकजुटता जाहिर की। जिसमें एनसीपी के अलावा राजद, झामुमो और शिवसेना ने खुलकर ममता को कांग्रेस पर तरजीह दी। जबकि इसमें दिलचस्प पहलू है कि बिहार में राजद तो झारखंड में झामुमो के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ चुकी है। वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस,एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार चल रही है। लेकिन इसके वाबजूद पश्चिम बंगाल में जमीनी हकीकत कोसों दूर है।

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