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सफरनामा 2020: क्या है Farm Bill 2020, जिसकी वजह से SAD-BJP से अलग होने के लिए हुई मजबूर

  • Updated on 12/31/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कृषि कानूनों के खिलाफ देश के दो राज्य पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Hariyana) में किसान व्यापक विरोध कर रहे हैं। ऐसे में किसान बड़ी संख्या में राज्यों से बाहर आकर दिल्ली की सभी सीमाओं पर ढेरा जमाए बैठे थे। यह किसान आंदोलन पंजाब में इतना बड़ा हो गया है कि अब  राज्य में पक्ष और विपक्ष सभी इसका समर्थन कर रहे हैं। और यह तेजी से बढ़ा होता जा रहा है। इसके परिणाम यह हुए कि राज्य में एनडीए की सहयोगी अकाली दल ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है। 

फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra singh Tomar) और किसानों संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। किसान संगठनों ने सरकार के सामने अब चार मांगे रखी है। जिनमें से बुधवार को हुई बैठक में सरकार ने किसानों की 2 शर्तों को मान लिया है। अब अगली बैठक 4 जनवरी को होने वाली है। जिसमें अन्य शर्तें मान ली जाएंगी। 

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केंद्र सरकार ने की अपील
किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाए। मगर केंद्र सरकार इसके लिए कुछ भी मानने को तैयाार नहींं है। केंद्र सरकार ने शुरआत में इस शर्त को मानने से बिलकुल मना कर दिया था मगर बाद में केंद्र इस पर चर्चा करने को तैयार है। केंद्र ने कहा है कि वह इन कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है मगर कानून को वापस लेने का अभी विचार नहींं हैै।  

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आंदोलन को समाप्त नहीं करने वाले
वहीं दूसरी तरफ किसान संगठन भी अपनी बातों पर अड़े हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह जब तक इस कानून को वापस नहीं ले लेते। तब तक वह आंदोलन को समाप्त नहीं करने वाले हैं। चाहे इसके लिए उन्हें 6 महीने ही क्यों न बैठना पड़े। इसके लिए किसान संगठन पूरी तैयारी करके आए हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है। 


नए विधेयकों में होंगे ये प्रावधान
नए विधेयक के नियामानुसार, अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले किसानों की फसल को सिर्फ मंडी से ही खरीदा जा सकता था। वहीं केंद्र ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज, इडेबल ऑयल आदि को आवश्यक वस्तु के नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा खत्म कर दी है। इन दोनों के अलावा केंद्र सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को बढ़ावा देने की भी नीति पर काम शुरू किया है, जिससे किसान नाराज हैं। विरोध करने वाले संगठनों में कांग्रेस से लेकर भारतीय किसान यूनियन जैसे बड़े संगठन भी शामिल हैं, जिन्हें अब अकाली दल का भी समर्थन मिल गया है। 

 

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