Thursday, Oct 28, 2021
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agriculture minister tomar said  before talks pm modi will not come under any pressure rkdsnt

वार्ता से पहले कृषि मंत्री तोमर बोले- पीएम मोदी किसी दबाव में नहीं आने वाले

  • Updated on 12/29/2020

नई दिल्ली, (नवोदय टाइम्स)। कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ 34 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने अगले दौर की वार्ता का सरकार का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। यह वार्ता आज 2 बजे विज्ञान भवन में होनी है। अब यह देखना होगा कि सरकार कमेटी बनाने से आगे बढ़ कर किसानों की मांग मानती है या फिर अपने उसी रुख पर कायम रहती है, जिसका इशारा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक बार फिर दिया है। तोमर ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं। 

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केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल की ओर से भेजे गए वार्ता प्रस्ताव का संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को अपना जवाब भेज दिया। किसानों ने अपना एजेंडा दोहराते हुए बुधवार को वार्ता करने पर सहमति जताई और आग्रह किया कि जो पूर्व के पत्र में एजेंडा दिया था, उसी पर बिंदुवार चर्चा हो। किसानों ने लिखा कि इस वार्ता में तीनों केंद्रीय कानूनों को रद्द करने, सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की कानूनी गारंटी देने, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश 2020 में ऐसे संशोधन जो दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हो एवं कासनों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लेने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। 

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इसके पहले आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच छह दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन बेनतीजा रही। देखना होगा कि सरकार अपने रुख में नरमी लाते हुए क्या बातचीत को आगे ले जाती या फिर उसी जगह ठहरी रहेगी, जहां से पिछली वार्ता टूटी थी। मालूम हो कि पिछली वार्ता में सरकार ने एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था और कहा था कि तीनों कानूनों पर किसान बिंदुवार लिखित आपत्तियां दें, जिस पर चर्चा कर कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी में कृषि मंत्रालय के अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ के साथ आंदोलनरत किसान यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया था। वार्ता रुक जाने के चलते बात आगे नहीं बढ़ी।

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...बुधवार को प्रस्तावित किसान-सरकार वार्ता से 24 घंटे पहले मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर मंत्री समूह की बैठक हुई। बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी थीं। माना जा रहा है कि इस बैठक में कल की वार्ता को लेकर रणनीति बनाई गई। हालांकि कानूनों को रद्द करने को लेकर सरकार के रुख में किसी तरह की नरमी नहीं दिख रही। लेकिन जिस तरह से किसानों का आंदोलन खिंचता जा रहा है, उससे सरकार की किरकिरी हो रही है। तमाम हथकंडे अपना कर भी सरकार किसान आंदोलन को अब तक तोड़ने में सफल नहीं हो पाई है।  
 
...विपक्ष मजबूत होता तो किसान आंदोलन क्यों करतेः टिकैत
विपक्ष पर किसानों को बरगलाने के आरोपों को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि विपक्ष इतना मजबूत होता तो आज किसानों को आंदोलन के लिए क्यों सड़क पर आना पड़ता। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता टिकैत ने यह बात ऐसे वक्त में कही, जब बुधवार को किसान और सरकार के बीच वार्ता होनी है। प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री से लेकर भाजपा के शीर्ष नेता तक बार-बार यह आरोप लगा रहे हैं कि विपक्ष किसानों को गुमराह कर रहा है। टिकैत ने कहा कि क्रांति चिंगारी बनेगी। देश के किसानों की बात सरकार को मान लेनी चाहिए।
 
...किसानों की ट्रैक्टर रैली स्थगित
सरकार के साथ प्रस्तावित अगले दौर की वार्ता के मद्देनजर किसानों ने पूर्व घोषित ट्रैक्टर रैली बुधवार को न करने का फैसला लिया है। यह रैली अब इस वार्ता के परिणाम पर निर्भर करेगी। अगर वार्ता विफल होती है तो किसान वीरवार को ट्रैक्टर रैली करेंगे और अपने आंदोलन को और गति देते हुए आगे बढ़ाएंगे। वार्ता अगर सकारात्मक रही और किसानों के पक्ष में परिणाम रहे तो इस ट्रैक्टर रैली की जरूरत ही नहीं होगी। मालूम हो कि किसानों ने बीते दिनों अपनी संयुक्त बैठक में सरकार का आग्रह स्वीकार करते हुए 29 दिसम्बर को अगले दौर की वार्ता बुलाने को कहा था। उसी बैठक में यह भी तय हुआ था कि 30 दिसम्बर को किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। सरकार की ओर से 30 दिसम्बर को वार्ता की तारीख दी गई है। इसलिए ट्रैक्टर रैली फिलहाल के लिए टल गई है।

मोदी सरकार से बातचीत के मद्देनजर किसानों का ट्रैक्टर मार्च स्थगित

 
...सरकार को किसानों की मांग माननी चाहिएः कांग्रेस
कांग्रेस ने एक बार फिर कहा कि सरकार को किसानों की मांग माननी चाहिए। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने मंगलवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इतनी कड़कड़ाती ठंड में किसान पूरी रात खुली सड़क पर बैठे हैं और मोदी सरकार के मंत्री रजाईयों की गरमाहट का आनन्द ले रहे हैं। किसानों की परेशानी के प्रति सरकार में जरा भी सहानुभूति नहीं दिख रही। कई दौर की वार्ता के बाद भी सरकार कानून में संशोधन या वापस लेने और एमएसपी एवं एपीएमसी को बनाए रखने को लेकर भी सरकार ने कोई कमिटमेंट नहीं किया है। उऩ्होंने कहा कि मौखिक आश्वासन देना सरकार की ट्रिक है। कानूनी रूप से लिख कर देने को तैयार नहीं है। ऐसा इसलिए कि कानून में शामिल करने पर संसद से पास कराना पड़ेगा। वैसे लिख कर देने की भी कोई वैल्यू नहीं है। उसे कभी भी खारिज या अनदेखा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुधवार को जो वार्ता हो, उसे कानून में शामिल किया जाना चाहिए।

 

 

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