Friday, May 20, 2022
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कृषि मंत्री तोमर ने किया साफ-अब जो कोर्ट कहे, या फिर संशोधन पर ही बात

  • Updated on 1/17/2021


नई दिल्ली, नवोदय टाइम्स)। नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को सरकार ने साफ कर दिया कि अब जो सुप्रीमकोर्ट कहे वो, या फिर केवल संशोधनों के विकल्पों पर बातचीत संभव है। शीर्ष अदालत इन कानूनों के अमल पर फिलवक्त के लिए रोक लगा चुकी है और कमेटी बना दी, जो समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी की पहली बैठक 19 जनवरी को है और उसी दिन किसान-सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता भी प्रस्तावित है।

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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को एक बयान में कहा कि सुप्रीमकोर्ट के दखल के बाद कानूनों को वापस लेने पर कोई भी चर्चा का मतलब नहीं रहा। अब तो केवल इसमें संशोधन के विकल्पों पर ही बातचीत की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि किसान संशोधन पर बात करें तो सरकार खुले मन से इसके लिए तैयार है। तोमर का यह बयान किसानों के साथ 10वें दौर की वार्ता से दो दिन पहले आया है।

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19 जनवरी को किसान-सरकार की अगली वार्ता प्रस्तावित है। तोमर ने बताया कि किसान यूनियनों को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें अन्य चीजों के साथ मंडियों और व्यापारियों के संबंध में उनकी आशंकाओं को दूर करने, पराली जलाने और बिजली कानूनों पर चर्चा करने के लिए बनी सहमति का उल्लेख है। इसके साथ कानूनों के संशोधन के विकल्पों पर चर्चा की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ अब तक नौ दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन वे सिर्फ कानूनों को निरस्त कराने की जिद पर अड़े हैं।

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कृषि मंत्री ने कहा कि ये कानून पूरे देश के किसानों के लिए बनाए गए हैं। कई किसान इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और इससे खुश हैं। कृषि विद्वान, वैज्ञानिक और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले इन कानूनों से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीमकोर्ट की दखल के बाद कानूनों को वापस लेने की मांग का कोई आधार नहीं रह गया है। जब सुप्रीम कोर्ट ने कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दिया है तो मैं समझता हूं कि इसे वापस लेने का सवाल ही खत्म हो गया है। मैं किसानों से उम्मीद करता हूं कि 19 जनवरी को होने वाली वार्ता में किसान कानून वापसी की मांग छोड़ खुले मन से संशोधन के विकल्पों पर बात करेंगे।
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