Wednesday, Aug 10, 2022
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aiims doing research on diseases caused by pollution, ''''secret'''' of many toxins will open

प्रदूषण से होने वाली बीमारियों पर एम्स कर रहा शोध, खुलेंगे कई टॉक्सिन के 'राज'

  • Updated on 9/17/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई खोज में जुटा है। एम्स ने रेफेरल मरीजों के भी शरीर में टॉक्सिन का पता लगाएगा। इसके तहत देश के किसी भी अस्पताल से मरीज एम्स आकर अपने यूरिन या ब्लड का सैंपल के जरिये इन घातक रसायनों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।

इससे एम्स को यह सोध करने में असानी होगी कि देश में लोगों को प्रदूषण ने किस हद तक प्रभावित किया है। प्रदूषण भोजन, पानी, फिर हवा से जुड़ा हो। इसके एक फायदा और है कि इससे संबंधित मरिजों के इलाज में मदद मिलेगी। बताया जा रहा है कि इस तरह का रिसर्च और सुविधा अब कर देश में कभी नहीं हुई।

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एम्स घातक रसायनों के बारे में पता लगा रहा है

एम्स अपने सोध के मद्देनजर शुरू हुई इकोटॉक्सिलॉजी प्रयोगशाला के तहत अपने यहां आने वाले मरीजों के ब्लड व यूरिन सैंपल के जरिये घातक रसायनों के बारे में पता लगा रहा है। इसके अलावा एम्स अब इस सुविधा को सभी अस्पतालों के लिए भी देना चाहता है।

इसके तहत एम्स सरकारी और निजी अस्पतालों को 25 से लेकर 1500 रूपये तक में यह सुविधा मरिजों को देगा। इसके लिए संबंधित अस्पताल से रेफरल होना जरूरी है। साथ ही एम्स आने के बाद उन्हें एक फॉर्म भरकर सैंपल के साथ जमा कराना होगा। टॉक्सिन के कम्पोनेंट, एलीमेंट और फ्लूड के अनुसार ही जांच और उसका शुल्क तय किया जाएगा। 

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रेफरल नरीज को जांच कराने पर शुल्क देना होगा
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर जावेद बताते है कि पिछले ही महिने एम्स में इकोटॉक्सिलॉजी केंद्र को स्थापित किया गया है। और अब किसी भी अस्पताल से रेफरल के मरीज इस सुविधा का लाभ ले सकते है। उन्होंने बताया कि रेफरल नरीज को जांच कराने पर शुल्क देना होगा। लेकिन किसी मरीज के शरीर में अगर घातक रसायन मिला तो उसके घल से पानी का सैंपल लेकर निशुल्क जांच की जाएगी। 


टॉक्सिन की जांच कराने वाले सभी मरिजों और बाहरी अस्पताल में इलाज करवाने वाले मरिजों, सभी का रिकोर्ड एम्स अपने पास रखेगा। इसका फायदा एम्स को आने वाले समय में होगा। एम्स यह भी रिसर्च कर रहा है जिसमें वह बता सके की देश के किस क्षेत्र में किस तरह के प्रदूषण से लोग घातक रसायनों के शिकार हो रहे हैं।  

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