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ajit pawar may come under enforcement directorate investigation on money laundering sohsnt

महाराष्ट्र: डिप्टी सीएम अजित पवार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करेगा ED

  • Updated on 10/18/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र (Maharashtra) में सिंचाई विभाग से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement directorate) ने विभाग के विभिन्न निगमों के खिलाफ अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। निदेशालय ने विदर्भ सिंचाई विकास निगम, कृष्‍णा घाटी सिंचाई प्रोजेक्‍ट और कोंकण सिंचाई विकास विभाग से जुड़े सभी ठेकेदारों और जल संसाधन विभाग के अफसरों की ओर से किए गए बांधों के टेंडर, रिवाइस अप्रूवल के संबंध में जांच शुरू कर दी है।ऐसे में अब महाराष्‍ट्र के डिप्‍टी सीएम अजित पवार की मुश्किलें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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साल 2012 में सामने आया था मामला
दरअसल, मनी लॉन्ड्रिंग का ये मामला साल 2012 में सामने आया था। इससे पहले अजित पवार 1999 से लेकर 2009 तक महाराष्‍ट्र के जल संसाधन मंत्री रहे थे। इस मामले में एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो (ACB) ने पवार को बीते साल ही क्‍लीन चिट दी थी, जिसके बाद इस मामले में बीते 27 नवंबर को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका के तुरंत बाद ही अगले दिन राज्य में महाविकास आघाड़ी सत्ता में आई थी।

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डिप्टी सीएम पवार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मालूम हो कि हाल ही में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने पवार समेत अन्य को 25,000 करोड़ के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंकों में अनियमितता मामले में क्लीन चिट दी है। निदेशालय ने कोर्च में ईओडब्ल्यू के इस निर्णय का पुरजोर विरोध किया है। ऐसे में शुरू हो रही ये जांच निश्चित ही राज्य के डिप्टी सीएम पवार को मुश्किलों में डाल सकती है।

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अजित पवार ने कही ये बात
इस संबंध में डिप्टी सीएम अजित पवार ने बीते कुछ दिन पहले कहा था कि जलयुक्त शिवार योजना की जांच शुरू करने के फैसले के पीछे कोई प्रतिशोध की भावना नहीं थी। उन्होंने कहा, पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार में जल संरक्षण मंत्री ने खुद इसमें 'अनियमितता' को माना था। ऐसे में अब इस परियोजना को लेकर जांच कराने का निर्णय लिया गया है और बीते गुरुवार को घोषणा की थी कि विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले में जांच करेगा क्योंकि खुद कैग ने परियोजना पर सवाल किए थे।

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