Monday, Nov 18, 2019
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Ayodhya case Verdict से AIMPLB नाखुश, कहा- 67 के बदले 5 एकड़ जमीन ये कहां का इंसाफ है?

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अयोध्या (Ayodhya) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य कमाल फारुकी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि हमें 5 एकड़ जमीन दे रहे हैं ये कहां का इंसाफ है। 

कमार फारुकी ने कहा है कि इसके बदले हमें 100 एकड़ जमीन भी दें तो कोई फायदा नहीं है। हमारी 67 एकड़ जमीन लेकर बैठे हैं। तो हमको दान में क्या दे रहे हैं वो। हमारी 67 एकड़ जमीन लेने के बाद 5 एकड़ जमीन दे रहे हैं। ये कहां का इंसाफ है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दी
अयोध्या राम जन्मभूमी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला आज सुना दिया है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या में विवादित स्थल राम जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिये 5 एकड़ भूमि आवंटित की जाए।  

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देश के सामाजिक ताने बाने को तार- तार कर दिया था
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भारतीय इतिहास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस व्यवस्था के साथ ही करीब 130 साल से चले आ रहे इस संवेदनशील विवाद का पटाक्षेप कर दिया। इस विवाद ने देश के सामाजिक ताने बाने को तार- तार कर दिया था।

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मंदिर का निर्माण ‘प्रमुख स्थल’ पर
शीर्ष अदालत ने कहा कि मंदिर का निर्माण ‘प्रमुख स्थल’ पर किया जाना चाहिए और सरकार को उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित करना चाहिए जिसके प्रति अधिकांश हिन्दुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म वहीं पर हुआ था। इस स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था।

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