Sunday, Sep 26, 2021
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कोरोना: HC की सरकार को फटकार, कहा- गांव में दिख रहे चुनाव के विनाशकारी परिणाम

  • Updated on 5/12/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। इस मामले को लकेर कोर्ट भी काफी अलर्ट मोड़ में नजर आ रही है। मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और सरकार को निशाने पर लेते हुए एक टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि कोरोना की पहली लहर में ये वायरस गांव तक नहीं पहुंचा था लेकिन इस दूसरी लहर से कई गांव प्रभावित हो गए हैं। जिसमें चुनाव का ही हाथ है।

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कोर्ट ने कहा ये
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचायत चुनाव में जान गंवाने वालों के परिजनों को मुआवजा राशि पर विचार करने की सोचा है। जब इस मामले में सुनवाई की गई तो वकील ने कहा कि किसी ने भी अपनी इच्छा से चुनाव में ड्यूटी नहीं की इसलिए उस दौरान मरने वाले मतदान अधिकारियों को एक- एक करोड़ रुपए का मुआवजा देना  चाहिए।

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तीन सदस्यों की कमेटी बनाने का फैसला
इसके साथ ही कोर्ट ने गांव में फैल रही कोरोना महामारी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां कोरोना का इलाज नहीं हो पा रहा है और कई गांवों में तो मेडिकल सुविधाएं भी नहीं है। इसलिए कोर्ट ने मिल रही शिकायतों की जांच के लिए 48 घंटे के भीतर हर जिले में तीन सदस्यों की कमेटी बनाने का फैसला लिया है। इस कमेटी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर का न्यायिक अधिकारी, मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर व एडीएम रैंक के एक प्रशासनिक अधिकारी होंगे।

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मांगा छोटे जिलों का ब्योरा
कोर्ट ने कहा कि कई छोटे जिलों से कोरोना के दौरान सही से इलाज नहीं पाने की शिकायते काफी आ रही है। ऐसे में बहराइच, बाराबंकी, बिजनौर, जौनपुर और श्रावस्ती जैसे छोटे जिलों में चल रही स्वास्थ्य सविधाओं का एक ब्योरा तैयार करके कोर्ट में समिट किया जाए। इसके साथ ही अब तक शहर में या गांव में कितनी टेस्टिंग हुई है इसकी भी पूरी जानकारी पेश करने को कहा है। जिससे सभी चीजों पर बारिकियों से नजरें रखी जा सकें। 

कोर्ट ने उस हलफनामे पर नाराजगी जाहिर की है जो अपर सॉलिसिटर जनरल द्वारा दाखिल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि उस हलफनामे में न तो कोविड मरीजों को अस्पतालों में उपलब्ध कराए जा रहे पौष्टिक आहार की जानकारी थी, न ही ऑक्सीजन व जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता से संबं‌धित जान‌कारियां थी। कोर्ट का कहना है कि इस वक्त कोरोना महामारी से देश में मरीजों की मौत हो रही है। ऐसे में इसका एक कारण भोजन भी हो सकता है क्योंकि पौष्टिक आहार ही शरीर को शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट में जो हलफनाम दाखिल किया गया था उसमें लेवल -1 के अस्पतालों का जिक्र था लेकिन लेवल -2 और लेवल -3 अस्पतालों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। 

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वैक्सीनेशन के रिजस्ट्रेशन पर भी पूछा सवाल
कोर्ट ने दिव्यांगों को वैक्सीन लगने के बारे में पूछा तो राज्य सरकार ने कहा कि हम केंद्र की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं और सरकार की गाइडलाइन में उनके लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया है। इसके बाद जब कोर्ट ने पूछा कि जो लोग अशिक्षित है या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे हैं उनके लिए क्या योजना है तो इस पर भी राज्य सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। इसलिए कोर्ट ने कहा कि हमारी जनसंख्या की भारी आबादी अभी भी गांव में रहती है ऐसे में गांव में अशिक्षित लोगों के लिए कोई व्यवस्थ्या की जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से 18 वर्ष से 45 वर्ष के बीच अशिक्षित मजदूरों और ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा सकने वाले ग्रामीणों के वैक्सीनेशन की कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में काफी तेजी से ये वायरस अपने पैर पसार रहा है। इसलिए जल्द से जल्द इन सभी इलाकों में टीकाकरण का काम युद्ध स्तर पर होना चाहिए। जिससे इस वायरस का खात्मा किया जा सकें।

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