Sunday, May 22, 2022
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कोरोना के साथ ही वैक्टर जनित रोगों पर वार, स्वस्थ्य केंद्र प्रभारियों को दिया प्रशिक्षण 

  • Updated on 5/9/2022

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। कोरोना के साथ ही अब वैक्टर जनित रोगों से बचाव के  लिए जनपद में विभिन्न कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। वहीं, सोमवार को जोनल कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी ने जनपद के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के एमओआईसी, लैब टैक्नीशियन और बेसिक हेल्थ वर्कर्स को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में डेंगू, मलेरिया अन्य वैक्टर जनित रोगों को रोकथाम के लिए अहम जानकारी दी गई। 

सोमवार को सीएमओ सभागार में प्रशिक्षण के दौरान डॉ. कीर्ति त्रिपाठी ने बताया कि डेंगू लार्वा साफ पानी में पनपता है। ऐसे में किसी भी खाली बर्तन में पानी एकत्र ना होने दें। बताया कि डेंगू बुखार के लिए जिम्मेदार मादा एडीज मच्छर का अंडा बिना पानी के भी दो साल तक जीवित रह सकता है। इसके विपरीत मादा एनाफि लीज मच्छर थोड़ा सुस्त होता है और कम काटता है। लेकिन खतरनाक दोनों हैं। 

मच्छरों के खिलाफ  और प्रभावी ढंग से अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का है। सोमवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधर ने भी वैक्टर जनित रोगों से बचाव की जानकारी दी। डॉ. कीर्ति त्रिपाठी ने प्रशिक्षण सत्र में बताया मादा मच्छर का जीवन एक माह का होता है, अपने जीवन काल में वह तीन से चार बार अंडे देती है। लेकिन एक बार में ही वह 250 से 300 अंडे देती है। 

मच्छर का श्रोत पानी ही है, वहीं पर काबू करने का प्रयास करें। साफ  पानी में पनपता है। मानव जनित श्रोतों का उपयोग करता है। इससे बचाव में मच्छरदानी का उतना महत्व नहीं है, जितना महत्व पूरे शरीर को ढककर रखने वाले कपड़ों का होता है। एडीज का अंडा काले रंग का होता है और लार्वा पानी के कंटेनर की तली में रहता है। एनाफिलीज का लार्वा जल की सतह पर रहता है। सभी एनाफिलीज में वायरस नहीं होता। इसकी वैक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए सालभर हाउस सर्वे एक्टिविटी जरूरी है। 
 

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