Saturday, Mar 23, 2019

यूं ही नहीं खास है अमरनाथ यात्रा, रास्ते से लेकर गुफा तक हर मोड़ से जुड़े है कई गहरे राज

  • Updated on 3/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देवों में देव महादेव यानी भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर सफल प्रयास करते हैं जिससे खुश होकर महादेव भी अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं भेजते। भक्तों में महादेव जी के हर धाम को लेकर एक अलग ही जिज्ञासा है। इनमें से एक है अमरनाथ धाम। 

यह एक ऐसा शिव धाम है जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात वहां विराजमान हैं। यह धार्मिक स्थल अपने आप में बहुत खास है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस पावन गुफा में बर्फीली बूंदो से बनने वाले हिम शिवलिंग भी विराजमान है। लेकिन इस गुफा और यहां तक पहुंचने वाले रास्ते से जुड़ी कई ऐसी बाते हैं, जिनसे शायद अभी तक आप वंचित है। चलिए आपको बताते है उन्हीं रोचक और रहस्यमयी किस्सें के बारे में।

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दरअसल, एक बार माता पार्वती ने महादेव से पूछा कि ऐसा क्यों है कि आप अमर-अजर है और आपके गर्दन में पड़ी नरमुंड की माला का रहस्य क्या है? इस बात पर महादेवने पार्वती के सवाल का जवाब देना ठीक नहीं समझा, इसलिए उन्होंने उस बात को टालने की कोशिश की, लेकिन पार्वती की जिद के चलते उन्होंने माता पार्वती को इस रहस्य को बताना स्वीकार किया। 

कहते हैं कि इस रहस्य को बताने के लिए भगवान शिव को एक एकांत जगह की आवश्यकता थी, जिसे तलाशते हए वह माता पार्वती को लेकर आगे बढ़ते चले गए। लेकिन रास्ते में जाते हुए महादेव अपनी हर चीज को रास्ते में छोड़ते हुए गए।

ऐसा इसलिए क्योंकि जो भी वो कहानी सुनता वो अमर हो जाता, जिसके चलते सबसे पहले भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को छोड़ा। नंदी को जिस जगह पर छोड़ा उसे पहलगाम कहा जाने लगा। और यहीं अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है।

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यहां से कुछ दूर जाने के बाद शिव जी ने अपने माथे से चंद्रमा को अलग कर दिया, जिस जगह पर उन्होंने ऐसा किया वह चंदनवाड़ी कहलाती है। इसके बाद गंगा जी को पंचतरणी में और गले के सांपो को शेषनाग पर छोड़ दिया, जिस कारण इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा। इसके बाद अमरनाथ यात्रा का अगला पड़ाव गणेश टॉप है। 

मान्यता है कि इस स्थान पर शिव ने अपने पुत्र गणेश को छोड़ा था। इसी तरह इन पांच चीजों को छोड़कर भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ प्रवेश किया। महादेव ने यहां अपने जीवन के उस गूढ रहस्यों की कथा शुरू कर दी।

भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि तुम मेरी कथा को सुनती रहना और हां करना बीच में रोकना मत। ऐसा कह वह उन्हें कथा सुनाने लगे, जिसे सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई।

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जब कथा समाप्त हुई तो महादेव ने माता पार्वती को सोता हुआ पाया। लेकिन वहां मौजूद एक कबूतर के जोड़े ने वो कथा सुन ली, जिसके बाद महादेव को उन पर क्रोध आया। दोनों कबूतर महादेव के पास आकर बोले कि हमने आपकी अमर कथा सुनी है, यदि आप हमें मार देंगे तो आपकी कथा झूठी हो जाएगी।

कहते हैं कि इस पर महादेव ने उन कबूतरों को वर दिया कि वो सदैव उस स्थान पर शिव और पार्वती के प्रतीक के रुप में रहेंगे।

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