मौसम और प्रशासन की बेरुखी से आठ घंटे बेटे के शव को लेकर घूमता रहा बेबस पिता

  • Updated on 1/23/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एक तरफ जहां शिमला में लोग भारी बर्भबारी का मजा ले रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मौसम का ये मिजाज किसी के लिए शामत बन के आया है। शिमला के ही एक निवासी के लिए ये बर्फ उस समय जख्म पर नमक का काम कर रहा था जब उस व्यक्ति का बेटा हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर जा चुका था। इस बेबस व्यक्ति के बेटे की मौत आइजीएमसी में मंगलवार को हो गई थी। 

हमीरपुर जिले के तहत भोरंज क्षेत्र के गांव नगरोटा गाजियां के निवासी जोगेंद्र राणा के 35 साल के बेटे को कैंसर था, वह अमेरिका की एक संस्था में वैज्ञानिक था। तबियत ज्यादा बिगड़ने की वजह से उसको भारत वापस लाया गया और आइजीएमसी में उसका उपचार किया जा रहा था।

मंगलवार को उसकी मौत हो गई। बेटे को खोने से पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, उसपर मौसम ने जख्म पर नमक का काम किया। हैरानी की बात तो यह थी की मौसम के साथ जिला प्रशासन भी मौसम की तरह जम गया और कोई मदद को आगे नहीं आया।

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अस्पताल से करीब नौ बजे परिजन एंबुलेंस से शव लेकर हमीरपुर के लिए रवाना हुए। इस दौरान शहर में हल्की बर्फबारी हो रही थी। इतना कम था कि पता चला एंबुलेंस के टायर घिसे हुए होने की वजह से ड्रईवर ने वाहन चलाने से मना कर दिया। लोगों से निराशा मिलने के बाद जोगेंद्र ने डीसी शिमला से मदद मांगी तो उन्होंने आश्वासन देकर फोन रख दिया। सुबह से शाम के पांच बज गये लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। आठ घंटे एंबुलेंस में ही बैठे रहने के बाद जोगेंद्र के बेटे के शव के वापस अस्पताल लाया गया।

डॉ. जनकराज ने बताया कि मौसम खराब होने की वजह से शव के घर नहीं ले सका इसलिए जब तक मौसम साफ नहीं हो जाता शव को आइजीएमसी के शव गृह में ही रखा जाएगा। उधर अपना बेटा खोने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मौसम का सितम और प्रशासन की बेरुखी ने परिवार को अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने का भी मौका नहीं दिया।

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