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नहीं रहे नर्मदा के लाल अमृतलाल बेगड़

  • Updated on 7/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ख्यातिनाम चित्रकार, साहित्यकार और नर्मदा समग्र के प्रमुख अमृतलाल बेगड़  शुक्रवार को 90 वर्ष की उम्र में खामोश हो गए। वह काफी दिनों से अस्थमा की बीमारी से पीड़ित थे और अस्पताल में भर्ती थे। अमृतलाल बेगड़ उन चित्रकारों और साहित्यकारों में  शामिल थे, जिन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए उल्लेखनीय काम किया। उन्होंने नर्मदा की 4 हजार किमी की पदयात्रा कर नर्मदा अंचल में फैली बेशुमार जैव विविधता से दुनिया को परिचित कराया।

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सन् 1977 में 47 साल की आयु में शुरू हुई उनकी यह परिक्रमा साल 2009 तक लगातार जारी रही। नर्मदा नदी को बचाने के उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम था जो उन्होंने लोगों को इस नदी से अवगत कराने के लिए नर्मदा एक परिक्रमा नामक किताब लिखी। यह किताब उनके नर्मदा परिक्रमा के दौरान हुए अनुभवों पर आधारित थी।

बेगड़ साहित्कार के साथ-साथ एक अच्छे चित्रकार भी थे। उनकी गुजराती में 7, हिन्दी में 3 पुस्तकें प्रकाशित हुईं। इसके अलावा उन्होंने 8-10 पुस्तकें बाल साहित्य पर भी लिखीं। इन पुस्तकों के 5 भाषाओं में 3-3 संस्करण भी निकले, जिनमें से कुछ का विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है। 'अमृतस्य नर्मदा', 'तीरे-तीरे नर्मदा' और 'सौंदर्य की नदी' उनकी तीन प्रसिद्ध पुस्तकें हैं। चौथी पुस्तक 'नर्मदा तुम कितनी सुंदर हो' वर्ष 2015 में प्रकाशित हुई।
जन्म स्थान
अमृतलाल बेगड़ जबलपुर के निवासी थे। हाल ही में उन्हें माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता संस्थान ने डी-लिट की उपाधि से नवाजा। वे गुजराती और हिन्दी में साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं महापडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार जैसे अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए थे।

बेगड़ का अंतिम संस्कार नर्मदा नदी के किनारे शुक्रवार शाम को किया जाएगा।

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