Tuesday, Oct 26, 2021
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हिंदी भाषा के लिए अनामिका और अंग्रेजी के लिए अरुंधति को मिला अकादमी पुरस्कार 2020

  • Updated on 9/18/2021

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। साहित्य अकादमी द्वारा कमानी सभागार में शनिवार को हिंदी में अनामिका और अंग्रेजी में अरुंधति सुब्रह्मण्यम समेत 24 भाषाओं के साहित्य अकादमी पुरस्कार 2020 विजेता लेखकों को पुरुस्कृत किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि प्रकृति ने सबको कुछ न कुछ विशेष दिया है और लेखकों को 3 योग्यताएं  संवेदनशीलता, परकाया प्रवेश और अभिव्यक्ति की विशेष क्षमता प्रदान की है।

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साहित्य परिवर्तन की अहिंसक प्रक्रिया है : विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
इन्हीं विशेष योग्यताओं के कारण वह  स्व: से अन्य को जोड़ता है और दूसरे की वेदना का प्रवक्ता बन जाता है। लेखक यह अपना धर्म समझकर करता है। आज जब पूरी दुनिया हिंसा से जूझ रही है, तब लेखक को अहिंसा का रास्ता अपनाकर समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए। साहित्य परिवर्तन की अहिंसक प्रक्रिया है। इस मौके पर साहित्य अकादमी अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने अकादमी पुरस्कार पर कहा कि यह भारत की बहुभाषिक, बहु सांस्कृतिक प्रतिभा का सम्मान है यह सांस्कृतिक उच्चता और मानवधर्मी विचारों के सुंदर संयोग का सम्मान है।

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साहित्यकार सामान्य जन की पीड़ा का प्रवक्ता होता है ः माधव कौशिक 
अकादमी उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने भारत की बहुभाषिकता और बहुवचनात्मकता को पूरी दुनिया में अनूठा कहा। उन्होंने कहा कि साहित्यकार सामान्य जन की पीड़ा का प्रवक्ता होता है। अकादमी सचिव के श्रीनिवास राव ने कहा कि साहित्य और भाषा में वह क्षमता होती है जो अपनी भाषा, सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक यथार्थ को अपने साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।

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24 भाषाओं के लेखक हुए पुरस्कृत
अपूर्व कुमार शइकीया-असमिया, शंकर-बांग्ला, बोडो-स्व.धरणीधर औवारि, अंग्रेजी-अरुंधति सुब्रमण्यम, हिंदी-अनामिका, गुजराती-हरीश मीनाश्रू, कन्नड़-एम. वीरप्पा मोइली, कश्मीरी- स्व. हृदय कौल भारती, कोंकणी-आर. एस. भास्कर, मैथिली-कमलकान्त झा, मलयालम-ओमचेरी एन.एन. पिल्लई, मणिपुरी-देवेन सिंह, नेपाली-शंकर देव ढकाल, उडिय़ा-यशोधरा मिश्रा, पंजाबी-गुरदेव सिंह रूपाणा, राजस्थानी-भंवरसिंह सामौर, संस्कृत-महेश चन्द्र शर्मा गौतम, संताली-रूपचंद हांसदा, सिंधी-जेठो लालवाणी, तमिल-इमाइयम, तेलगू-निखिलेश्वर और उर्दू-हुसैन-उल-हक।

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भोजपुरी साहित्कारों को भी अकादमी भाषा सम्मान-2021
साहित्य अकादमी भाषा सम्मान के लिए भोजपुरी भाषा में उत्कृष्ट लेखन के लिए डॉ. अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा ’नीरद’ के नाम की संयुक्त रूप से हुई घोषणा की गई। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष अजित दुबे ने इस पर कहा कि विगत 8 वर्षों के बाद गैर मान्यता प्राप्त भाषा की श्रेणी में भोजपुरी के साहित्यकारों का सम्मान भोजपुरी भाषा और साहित्य के लिए प्रोत्साहित करने वाला निर्णय है। इसमें सम्मान स्वरूप एक लाख रुपया और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। मालूम हो कि मान्यता प्राप्त 24 भाषाओं में साहित्य अकादमी प्रति वर्ष पुरस्कार देती है और अन्य गैर मान्यता प्राप्त भाषाओं के साहित्यकारों को भी समय-समय पर भाषा सम्मान प्रदान किया जाता है।

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साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कारों की हुई घोषणा
साहित्य अकादेमी द्वारा शनिवार को ही 2020 के अनुवाद पुरस्कारों की भी घोषणा की गई। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक में 24 पुस्तकों को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2020 के लिए अनुमोदित किया गया। पुस्तकों का चयन नियमानुसार गठित संबंधित भाषाओं की त्रिसदस्यीय निर्णायक समितियों की संस्तुतियों के आधार पर किया गया। पुरस्कार, पुरस्कार वर्ष के पूर्ववर्ती वर्ष के पहले के पांच वर्षों (1 जनवरी 2014 से 31 दिसम्बर 2018) के दौरान प्रथम प्रकाशित अनुवादों को प्रदान किए गए है। पुरस्कार के रूप में 50,000 रुपए की राशि और उत्कीर्ण ताम्रफलक इन पुस्तकों के अनुवादकों को इसी वर्ष आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे।

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