जमीन अतिक्रमण मामले में अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

  • Updated on 12/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के साथ इंडोर स्टेडियम के निर्माण में 720 वर्ग गज सरकारी जमीन के अतिक्रमण के मामले में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ गुरूवार को प्राथमिकी रद्द कर दी। जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा, ‘‘हम प्राथमिकी रद्द कर रहे हैं।’’ पीठ ने कहा कि पट्टे पर भूमि हस्तांतरण में किसी प्रकार की अपराधिता नहीं है।

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इस मामले में ठाकुर, हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, दो आईएएस अधिकारियों, राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत और सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने के आरोप में तीन अक्टूबर 2013 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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पुलिस का दावा था कि एसोसिएशन के अध्यक्ष ठाकुर और अन्य ने राज्य सरकार के अधिकारियों की सांठगांठ से शिक्षा विभाग की दोमंजिला इमारत गिरा दी थी और क्रिकेट एसोसिएशन ने 720 वर्ग गज जमीन गैरकानूनी तरीके से हथिया ली थी।     केन्द्र सरकार ने इस मामले में दोनों आईएएस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ था।

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इस मामले में सुनवाई के दौरान ठाकुर और अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने दलील दी कि इस मामले में कोई भी अपराधिता नहीं थी और सभी कुछ कानून के अनुसार हुआ था। उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर और अन्य के खिलाफ यह मामला तत्कालीन राज्य सरकार के राजनीतिक प्रतिशोध के अलावा कुछ नहीं था। यही नहीं, केन्द्र ने भी आरोपी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से यह कहते हुये इंकार कर दिया है कि उन्होंने अपने आधिकारिक कार्य के दौरान यह किया था।

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