Monday, May 23, 2022
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Approved Land Pooling  Policy for Industrial Development Authorities sohsnt

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए ‘लैंड पूलिंग’ नीति को योगी सरकार ने दी मंजूरी

  • Updated on 9/23/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार (Yogi Govt) ने औद्योगीकरण के विकास के लिए औद्योगिक प्राधिकरण में 'लैंड पूलिंग' नीति लागू करने संबंधी प्रस्ताव को बीते मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी प्रदान कर दी है। इस नीति के तहत भू-स्वामी औद्योगिक विकास में स्वेच्छा से भागीदारी बन सकेंगे। भू-स्वामी से ली गई जमीन का 25 फीसद विकसित भूमि उसे वापस मिल जाएगी जिसे वह किसी दूसरे को हस्तांतरित भी कर सकेगा।

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ये है नीति
इस नीति के आने के बाद अब औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा न्यूनतम 25 एकड़ वही भूमि ली जाएगी जो उसके मास्टर या जोनल प्लान के तहत 18 मीटर रोड के दायरे में आएगी। इसके बाद 80 फीसद भू-स्वामी स्वेच्छा से भूमि देने के लिए तैयार हो सकें। शेष 20 फीसद भूमि भू-अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 व अन्य विधि संगत तरीके से ली जा सकेगी।

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प्रतिमाह 5 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा
इस नीति में अच्छी बात ये है कि भू-स्वामी को 5 वर्ष के दौरान अगर विकसित भूमि मुहैया नहीं कराई जाती तब तक फसल पुनर्वासन के लिए क्षतिपूर्ति के तौर पर प्रतिमाह पांच हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा नीति में बाई बैक की सुविधा भी दी गई है जिसके जरिए भू-स्वामी आवंटित विकसित भूमि को 5 वर्ष के बाद संबंधित प्राधिकरण को उस समय के भू-उपयोद के लिए लागू दर के 90 फीसद दर पर लौटा सकेंगे।

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परियोजना में आने वाले भवनों के लिए नीति 
इसके साथ ही नीति के तहत जमीन देने वाले भू-स्वामियों को दी गई जमीन की 25 फीसदी विकसित भूमि लाटरी के जरिए आवंटित की जाएगी। इसके अलावा परियोजना में आने वाले भवन का पीडब्ल्यूडी की दर से मूल्यांकन कर भू-स्वामी को धनराशि दी जाएगी। नीति के मुताबिक, भू-स्वामियों को अपने पक्ष में विकसित भूमि के आवंटन या पट्टे पर किसी तरह का स्टाम्प ड्यूटी भी नहीं देना होगी।

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