Tuesday, Oct 04, 2022
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कलाकुंभ के जरिए कलाकार देंगे गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि

  • Updated on 1/14/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। आजादी का अमृत महोत्सव, आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी श्रृंख्ला में राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) कलाकुंभ के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को उनके चित्रों द्वारा श्रद्धांजलि दे रहा है। बता दें कि देशभर के 500 से अधिक कलाकारों ने मिलकर देश के अलग-अलग हिस्सों से संबंधित स्वतंत्रता संग्राम के गुमनायकों के चित्र भुवनेश्वर और चंडीगढ में 75 मीटर के कुल 10 स्क्रोल कैनवस पर तैयार किए हैं जिनकी कुल लंबाई 750 मीटर से भी अधिक है। इन चित्रों को गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर प्रदर्शित किया जाएगा।
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एनजीएमए द्वारा संस्कृति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से कलाकुंभ का आयोजन
एनजीएमए द्वारा संस्कृति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से भुवनेश्वर और चंडीगढ में कलाकुंभ का आयोजन किया था। 10-17 दिसंबर तक भुवनेश्वर के कलिंगा इंस्टीटच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और सिलिकॉन इंस्टीटच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी व 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक चंडीगढ के चितकारा विश्वविद्यालय में कलाकुंभ का आयोजन किया गया था। इस दौरान कलाकारों गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी वीरता और संघर्ष की कहानियों को चित्रों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा। इन स्क्रोल्स में हमारे देश की विभिन्न कला एवं संस्कृति की समृद्धता और क्षमता के माध्यम से हमारे राष्ट्रीय गौरव और उत्कृष्टता को दिखाया गया है। बता दें कि उड़ीसा और चंडीगढ़ में 500 से अधिक कलाकारों ने मिलकर देश के विभिन्न हिस्सों से संबंधित आजादी के गुमनाम नायकों पर गहन शोध के बाद उनके चित्रों को चित्रित किया।
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कई प्रदेशों की चित्रकलाओं व लोककलाओं का प्रदर्शन
भुवनेश्वर में जहां उड़ीसा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, बंगाल, और आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों के चित्रों को पटचित्र, तलपात्र चित्र, मंजुसा, और मधुबनी कला से चित्रित किया गया। वहीं चंडीगढ़ में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के गुमनाम नायकों की वीरता और संघर्ष की कहानियों को दर्शाया गया है। जिसमें पिछवई, फड और मांडना जैसी देश की विभिन्न लोक एवं जनजातीय कला विद्याओं को चित्रित किया गया है। वहीं 10 स्क्रोल्स पर लगभग 750 मीटर की पेंटिंग्स में कलाकारों ने नंदलाल बोस द्वारा बनाए गए रचनात्मक चित्रों को भी समाहित किया है।
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कलाकुंभ होगा राजपथ पर ओपन गैलरी 
एनजीएमए के महानिदेशक अद्वैत चरन गणनायक ने कहा कि गणतंत्र दिवस 2022 में राजपथ पर कलाकुंभ को प्रदर्शित किया जाएगा जो एक तरह से ओपन गैलरी होगी। जिसे सभी देख पाएंगे। जब यह स्क्रॉल राजपथ पर लगाए जाएंगे तो इनसे लोग आजादी के गुमनाम नायकों के इतिहास के बारे में ज्यादा से ज्यादा जान सकेंगे और उनकी भारत के आधुनिक, स्वदेशी और समकालीन कलाओं के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी।

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