Saturday, Nov 17, 2018

RBI विवाद पर अरविंद पनगढ़िया ने दी मोदी सरकार को खास सलाह

  • Updated on 11/8/2018

नई दिल्ली/एजेंसी। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया का सुझाव है कि सरकार और आरबीआई दोनों को ‘‘कुछ नरमी’’ दिखानी होगी और राष्ट्रीय हित में मिल जुल कर चलना चाहिए। उन्होंने सरकार और आरबीआई के बीच जारी विवाद के दौरान यह बात कही है।

राहुल गांधी ने बोला PM मोदी पर हमला, नोटबंदी को बताया ऐतिहासिक कलंक

चर्चित अर्थशास्त्री पनगढ़िया ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि अमेरिका के फेडरल रिजर्व के मुकाबले आरबीआई कानूनी रूप से कम स्वतंत्र है पर प्रभावी तौर पर देखा जाए तो उसे उतनी ही आजादी है जितना कि अमेरिकी नियामक को। आरबीआई और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि जब दोनों पक्षों के बीच मतभेद होता है, उन्हें अंतत: सलुह करनी चाहिए और राष्ट्रीय हित में एक साथ चलना चाहिए।’’ 

नोटबंदी के दो साल : पी. चिदंबरम ने साधा अरुण जेटली पर निशाना

पनगढ़िया इस समय अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्राचार्य है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी सरकार और फेडरल रिजर्व कभी-कभी साथ मिलकर चलते हैं। वर्ष 2008 में वित्तीय संकट के तुरंत बाद ऐसा ही देखा गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया मतभेदों की खबर को कुछ ज्यादा ही फैलाता है। मीडिय दोनों की सहमति का दायरों की बात नहीं करता। 

CBI डायरेक्टर वर्मा, स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना CVC से मिले, रखा अपना पक्ष

पूर्व में कई बार देखा गया है कि वित्त मंत्रालय और आरबीआई प्रमुख के बीच ब्याज दर, नकदी और बैंक क्षेत्र के प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर मतभेद हैं लेकिन अंतत: दोनों पक्ष साथ चलते हैं। इस बार दोनों पक्षों के बीच मतभेद उस स्तर पर पहुंच गया जहां ऐसी चर्चा है कि सरकार ने आरबीआई कानून की धारा 7 के तहत केंद्रीय बैंक के साथ विचार-विमर्श शुरू किया है। पूर्व में कभी भी इस धारा का उपयोग नहीं किया गया।

नोटबंदी के दो साल: केजरीवाल बोले- मोदी सरकार के घोटालों की सूची अंतहीन

वित्त मंत्रालय और उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाले आरबीआई के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। इसमें वित्तीय दबाव झेल रहे बिजली क्षेत्र को राहत, सार्वजनिक क्षेत्र के कमजोर बैंकों का प्रबंधन, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के समक्ष नकदी समस्या का समाधान तथा रिजर्व बैंक से स्वतंत्र भुगतान नियामक प्राधिकरण का गठन शामिल हैं। समझा जाता है सरकार ने धारा 7 के तहत तीन पत्र आरबीआई को भेजा है। आरबीआई कानून की यह धारा सरकार को जनहित से जुड़े मामले में केंद्रीय बैंक के गवर्नर को निर्देश देने का अधिकार देता है।

चुनावी रेवड़ियां बांटने को RBI से करोड़ों रुपये चाहती है मोदी सरकार: कांग्रेस

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.