Thursday, Jan 23, 2020
auto equipment business down 10 percent impact on job of one lakh people

10 प्रतिशत घटा ऑटो उपकरण, एक लाख लोगों की नौकरी पर असर

  • Updated on 12/7/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश के ऑटोमोबाइल (Automobile) उद्योग में पिछले एक साल से छाई सुस्ती के कारण ऑटो उपकरण उद्योग के कारोबार में 2019-20 की पहली छमाही में 10.1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह पिछले साल की इसी अवधि के 1,99,849 करोड़ रुपए से घटकर 1,79,662 करोड़ रुपए रह गया।

भारतीय ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माता संघ (ACMA) के अध्यक्ष दीपक जैन और महानिदेशक विन्नी मेहता ने वीरवार को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में उद्योग के प्रदर्शन की जानकारी देते हुए कहा कि मंदी की वजह से इस वर्ष जुलाई तक 1 लाख लोगों के रोजगार गए। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब ऑटो उपकरण उद्योग के कारोबार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 

श्री जैन ने उद्योग के कारोबार में गिरावट के कारण गिनाते हुए कहा कि वाहनों की मांग में कमी, बी.एस.-4 से बी.एस.-6 वाहनों के निर्माण के लिए हालिया निवेश, तरलता की तंगी और इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति को लेकर संशय के अलावा अन्य कारणों की वजह से वाहन उपकरण क्षेत्र की विस्तार योजनाओं पर असर पड़ा।

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एक समान 18 प्रतिशत GST किया जाए
देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 2 प्रतिशत से अधिक का योगदान और 50 लाख लोगों को रोजगार देने वाले उद्योग की दीर्घकालिक आधार पर निरंतर गति बनाए रखने के लिए श्री जैन ने ऑटो उपकरण पर एक समान 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) किए जाने की सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 60 प्रतिशत ऑटो उपकरण पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है जबकि शेष पर 40 प्रतिशत जिसमें मुख्यत: दोपहिया और ट्रैक्टर उपकरण पर 28 प्रतिशत जीएसटी है। उन्होंने कहा कि दोपहिया और ट्रैक्टर उपकरणों पर अधिक जीएसटी होने से ग्रे बाजार को बढ़ावा मिलता है। सभी उपकरणों पर 18 प्रतिशत जीएसटी कर दिए जाने से वाहन बिक्री के बाद ग्राहकों को गुणवत्ता वाले उपकरण तो मिलेंगे ही, सरकार की आय भी बढ़ेगी। इसके अलावा निवेश के लिहाज से मध्यम एवं लघु उद्योगों की परिभाषा में भी बदलाव की जरूरत है।

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निर्यात 2.7 प्रतिशत बढ़ा
श्री मेहता ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऑटो उपकरणों का निर्यात 2.7 प्रतिशत बढ़कर पहले के 50034 करोड़ रुपए से 51397 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यूरोप (Europe) को सर्वाधिक 32 प्रतिशत निर्यात किया गया जबकि इसके बाद नार्थ अमरीका और एशिया क्रमश: 30 और 26 प्रतिशत रहे। इस दौरान आयात 6.7 प्रतिशत घटकर 61686 करोड़ रुपए से 57574 करोड़ रुपए रह गया। आयात मुख्यत: 62 प्रतिशत एशिया से रहा। यूरोप और नॉर्थ अमरीका से आयात क्रमश: 28 और 8 प्रतिशत रहा।  

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