Wednesday, Sep 18, 2019
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ऑटोमोबाइल सेक्टर में 20 साल की सबसे बड़ी मंदी, अशोक लेलैंड ने रोका काम

  • Updated on 9/10/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में जारी आर्थिक सुस्ती के बीच यात्री वाहनों और कारों की घरेलू बिक्री में अगस्त महीने की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह 1997-98 यानी लगभग 20 साल के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है, जब से सोसायटी ऑफ  इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) ने आंकड़े जुटाने शुरू किए हैं। इसके साथ ही घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री में लगातार 10वें महीने गिरावट दर्ज की गई है। 


यह देश के ऑटोमोबाइल सैक्टर में छाई मंदी को एक और बड़ा झटका। अगस्त में यात्री कारों की बिक्री पिछले साल के इसी माह की तुलना में 41.09 प्रतिशत की भारी गिरावट से 1 लाख 15,000 यूनिट रह गई। भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता संस्था (सियाम) ने अगस्त 2019 में वाहन बिक्री के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अगस्त में दोपहिया वाहनों की बिक्री भी पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.2 प्रतिशत घटकर 15.1 लाख यूनिट रह गई। सियाम आंकड़ों के अनुसार मध्यम एवं भारी वाणज्यिक वाहनों की बिक्री आधे से भी कम रह गई। इस वर्ग की बिक्री 54.3 प्रतिशत घटकर 15,573 यूनिट रही। हल्के वाणज्यिक वाहनों की बिक्री 28.2 प्रतिशत घटकर 36,324 यूनिट रही। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 38.7 प्रतिशत घटकर 51,876 यूनिट रही। यात्री वाहनों की बिक्री 31.6 प्रतिशत गिरकर 1.96 लाख यूनिट रही।  

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वाहन निर्यात में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि
वाहन निर्यात में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह अगस्त में 4.2 लाख यूनिट रहा। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से अगस्त के 5 माह में कुल वाहन उत्पादन भी 12.25 प्रतिशत घटकर एक करोड़ 20 लाख 20 हजार 944 वाहन रह गया। पिछले साल इस दौरान एक करोड़ 36 लाख 99 हजार 848 वाहनों का उत्पादन किया गया था। 5 माह की अवधि में यात्री वाहनों की बिक्री 23.54 प्रतिशत कम रही।

अशोक लेलैंड के 5 संयंत्रों में 5 से 18 दिन ‘नो वर्किंग डेज’
भारी वाहन बनाने वाली अग्रणी कंपनियों में से एक अशोक लेलैंड ने मांग में कमी को ध्यान में रखते हुए 5 संयंत्रों में सितम्बर माह के दौरान 5 से लेकर 18 दिन तक ‘नो वर्किंग डेज’ का ऐलान किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि सबसे अधिक पंतनगर संयंत्र में सितम्बर माह के दौरान नो वर्किंग डेज रहेंगे। सबसे कम होशूर 1, 2 और सीपीपीएस में 5 दिन नो वर्किंग डेज होंगे।

एन्नोर संयंत्र में सितम्बर माह के दौरान 16 दिन, अलवर और भंडारा में 10-10 दिन नो वर्किंग डेज रहेंगे। गौरतलब है कि देश की यात्री कार वर्ग की अग्रणी कंपनी मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड ने भी कंपनी के वाहनों की मांग में कमी को देखते हुए 7 और 9 सितम्बर को गुरुग्राम व मानेसर संयंत्र में उत्पादन बंद रखा था। 16 साल बाद यह पहला मौका था जब कंपनी ने उत्पादन बंद रखा।  

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ऑटो कम्पोनैंट सैक्टर भी सुस्ती की चपेट में, 14,302 करोड़ रुपए का निवेश रुका
ऑटो कम्पोनैंट सैक्टर पर वाहन उद्योग की सुस्ती की सीधी मार पड़ी है। कम्पोनैंट सैक्टर के पास काम घट गया है। इसके कारण कम्पोनैंट बनाने वाली कम्पनियों ने इस साल कम से कम 2 अरब डॉलर (करीब 14,302 करोड़ रुपए) निवेश करने की योजना को टाल दिया है। ऑटोमोटिव कम्पोनैंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के प्रैजीडैंट दीपक जैन ने कहा कि क्षमता विस्तार में होने वाला निवेश रोक दिया गया है।

हालांकि इनोवेशन पर निवेश जारी है। देश का ऑटो कम्पोनैंट बाजार करीब 4 लाख करोड़ रुपए का है। यह क्षेत्र देश के जीडीपी में 2.3 प्रतिशत का योगदान करता है। साथ ही यह क्षेत्र करीब 50 लाख लोगों को रोजगार देता है। ऑटो कम्पोनैंट सैक्टर के पास जितना काम करने की क्षमता है, उसके मुकाबले उसके पास काम घटकर महज 50-60 प्रतिशत रह गया है। जैन ने कहा कि स्थिति जब सामान्य थी, तब सैक्टर के पास क्षमता के मुकाबले 75-80 प्रतिशत काम था। इसके कारण करीब एक लाख कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितम्बर में हमारे पास सर्वाधिक काम था। हमारा विकास 10 फीसदी से अधिक की रफ्तार से हो रहा था।

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वाहन क्षेत्र में रोजगार बचाने के लिए कदम उठाने की जरूरत : किरन मजूमदार शॉ
वाहन क्षेत्र में रोजगार बचाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। यह देश के विनिर्माण क्षेत्र में कुल 50 प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराता है। बायोकॉन की चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक किरन मजूमदार शॉ ने यह बात कही। वाहन बिक्री के आंकड़े जारी होने के बाद शॉ ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही। शॉ ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, ‘‘यात्री वाहन बिक्री में अगस्त में 1997-98 के बाद सबसे तीव्र मासिक गिरावट देखी गई है।

हमें सिर्फ वाहन क्षेत्र को बचाने के लिए कदम उठाने की नहीं बल्कि देश में 50 प्रतिशत विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियां बचाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि वाहन क्षेत्र इतने रोजगार का प्रतिनिधित्व करता है।’’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि जी.एस.टी. की 28 प्रतिशत दर का अन्य हर कर दर के तहत संग्रह में प्रभाव का आकलन हो यह अच्छा होगा। ग्राहकों की अवधारणा को बदलने की जरूरत है। वाहन बिक्री में लगातार गिरावट के चलते वाहन और कलपुर्जा विनिर्माताओं ने सरकार से जी.एस.टी. की दर को 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने की मांग रखी है। 

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